सुगंध सुहानी आयेंगी इस मोड़ के बाद
यादें गाँव की लाएंगी इस मोड़ के बाद
जिस नीम पे झूला करता था बचपन मेरा
वही डालियाँ बुलाएंगी इस मोड़ के बाद
अब तक बसी हैं ऋतुएँ जो मेरी साँसों में
देखो अभी मह्कायेंगी इस मोड़ के बाद
बिछुड़ गई थी दोस्ती जीवन की राहों में
वो झप्पियाँ बरसाएंगी इस मोड़ के बाद
नखरों से खाते थे जिन हाथों से निवाले
वो अंगुलियाँ तरसायेंगी इस मोड़ के बाद
मचल रही होंगी बड़ी भाभी और बहनिया
बैग मेरा खुलवायेंगी इस मोड़ के बाद
समझ लेता था मैं जिनके मन की भाषाएँ
वो गइयां पूंछ हिलाएंगी इस मोड़ के बाद
देख के फौजी वर्दी में भर आयेंगी आँखें
माँ आँचल में छुपायेंगी इस मोड़ के बाद
मिलती हैं जो जाकर मेरे घर के द्वार से
पगडंडियाँ अब आयेंगी इस मोड़ के बाद
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