गैस होगी न कोयला होगा
चूल्हा ग़मजदा मिला होगा
पेट रोटी टटोलता हो जब
थाल में अश्रु झिलमिला होगा
भूख की कैंचियों से कटने पर
सिसकियों से उदर सिला होगा
चाँद होगा न चांदनी होगी
ख़्वाब में भी तिमिर मिला होगा
भोर होगी न रौशनी होगी
जिंदगी से बड़ा गिला होगा
लग रहा क्यूँ हुजूम अब सोचूँ
मौत का कोई काफिला होगा
बेबसी की बनी कब्र पर ही
नफरतों का पुहुप खिला होगा
अब बता "राज"दोष है किस का
जिंदगी ने उसे छ्ला होगा
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