यह ब्लॉग खोजें

बुधवार, 13 फ़रवरी 2013

ऋतुराज बसंत


(कुण्डलिया)
पीले पीले वेश में ,आया आज बसंत
परिवर्तन की गोद में ,जा बैठा हेमंत
जा बैठा हेमंत ,खेत में सरसों फूली
महक उठा ऋतुकंत,प्रेयसी झूला झूली
रसिक भ्रमर को भाय, मनोहर वदन सजीले
कह ऋतुराज बसंत ,अमिय रस पीले पीले 
*****************************

27 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर नवगीत, बसंत के आगमन पर

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ....!!
    शुभकामनायें ...राजेश जी ...

    जवाब देंहटाएं
  3. प्रभावशाली ,
    जारी रहें।

    शुभकामना !!!

    आर्यावर्त
    आर्यावर्त में समाचार और आलेख प्रकाशन के लिए सीधे संपादक को editor.aaryaavart@gmail.com पर मेल करें।

    जवाब देंहटाएं
  4. namaste rajesh kumari ji
    bahut sundar kundaliyan likhi hai aapne is vidha me pahali baar aapko padha , bahut acchi pakad hai aapki , badhai aapko umda srajan ke liye

    जवाब देंहटाएं
  5. नमस्कार, माननीया. बहुत सुन्दर कविता है.

    जवाब देंहटाएं
  6. सराहनीय अभिव्यक्ति,बसंती खुशबु लिए सुंदर प्रस्तुती।,

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. मेरे ब्लोग्स संकलक (ब्लॉग कलश) पर आपका स्वागत है,आपका परामर्श चाहिए.
      "ब्लॉग कलश"

      हटाएं
  7. आपकी पोस्ट 14 - 02- 2013 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें ।

    जवाब देंहटाएं
  8. बढ़िया कुण्डलियाँ-
    आभार आदरेया ||

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. एकदम सटीक-
      आदरेया |
      बहुत बहुत बधाई ||

      फूली फूली घूमती, एक माह से शीत |
      फूली सरसों तभी से, फैले जग में प्रीत |
      फैले जग में प्रीत, मधुर रस पीले पीले |
      छाई नई उमंग, जिंदगी जी ले जीले |
      पीले पीले फूल, तितलियाँ रस्ता भूली |
      भौरें मस्त अनंग, तितलियाँ रति सी फूली ||

      हटाएं
  9. वाह.....
    मनभावन वसंत आया...आपकी पोस्ट पर छाया :-)
    सुन्दर!!

    सादर
    अनु

    जवाब देंहटाएं
  10. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

    जवाब देंहटाएं
  11. बसंती रंग में रंगी बहुत सुन्दर कुण्डलियाँ...
    :-)

    जवाब देंहटाएं
  12. सुन्दर प्रस्तुति.बहुत सुन्दर कुण्डलियाँ.
    प्यार पाने को दुनिया में तरसे सभी, प्यार पाकर के हर्षित हुए हैं सभी
    प्यार से मिट गए सारे शिकबे गले ,प्यारी बातों पर हमको ऐतबार है

    प्यार के गीत जब गुनगुनाओगे तुम ,उस पल खार से प्यार पाओगे तुम
    प्यार दौलत से मिलता नहीं है कभी ,प्यार पर हर किसी का अधिकार है

    जवाब देंहटाएं
  13. फूली फूली घूमती, एक माह से शीत |
    फूली सरसों तभी से, फैले जग में प्रीत |
    फैले जग में प्रीत, मधुर रस पीले पीले |
    छाई नई उमंग, जिंदगी जी ले जीले |
    पीले पीले फूल, तितलियाँ रस्ता भूली |
    भौरें मस्त अनंग, तितलियाँ रति सी फूली ||

    वसंत का इस से सुन्दर चित्रण और क्या होगा .

    ReplyDelete

    जवाब देंहटाएं
  14. (कुण्डलियाँ )
    पीले पीले वेश में ,आया आज बसंत
    परिवर्तन की गोद में ,जा बैठा हेमंत
    जा बैठा हेमंत ,खेत में सरसों फूली
    महक उठा ऋतुकंत,प्रेयसी झूला झूली
    रसिक भ्रमर को भाय, मनोहर वदन सजीले
    कह ऋतुराज बसंत ,अमिय रस पीले पीले
    आनंद वर्षं भयो .राग रंग बरसा वसंत का अनंग का .

    जवाब देंहटाएं
  15. बड़े ही सुन्दर भावों के साथ वसंत की अभ्यर्थना की है राजेश जी ! मन बाग़ बाग़ हो गया ! बसंत पंचमी की आपको हार्दिक शुभकामनाएं !

    जवाब देंहटाएं
  16. बहुत सुंदर ! आकर्षक चित्र सहित प्रस्तुति के लिए बधाई !

    जवाब देंहटाएं
  17. प्रेम दिवस ,जीवन का राग रंग मुबारक 365 दिन .शुक्रिया आपकी टिपण्णी का .

    जवाब देंहटाएं
  18. बहुत सुन्दर ..बसंत का स्वागत :-)

    जवाब देंहटाएं