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मंगलवार, 15 मार्च 2011

वो क्या जाने

जो पुष्पों के संग ही खेला 
काँटों की चुभन वो क्या जाने ,
सेंकता है बर्फ से जो अपने हाथ 
अग्नि की तपन वो क्या जाने !!
         जो नृप बनकर ही जीता रहा ,
          रंक का दमन वो क्या जाने 
          सर जिसका कभी झुका न हो ,
          हरी का नमन वो क्या जाने !!
झोली कभी जिसकी खाली न हो ,
पाने की लगन वो क्या जाने !! 

10 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर प्रस्तुति!
    बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति| धन्यवाद|

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  3. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 12 -04-2012 को यहाँ भी है

    .... आज की नयी पुरानी हलचल में .....चिमनी पर टंगा चाँद .

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  4. सत्य कहा आपने. आभाव ही जिन्दगी में किसी वस्तु के मूल्य को समझा पाते हैं.

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  5. सही कहा आपने.....

    झोली कभी जिसकी खाली न हो ,
    पाने की लगन वो क्या जाने !

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