छोडो अपनी ढाई चाल बहुत हुआ
खून में आया उबाल बहुत हुआ
आम जनता की आवाज दबे नहीं
देश में लाये भूचाल बहुत हुआ
खींच लेगा आज वक़्त ये कुर्सियां
कर चुके जितना धमाल बहुत हुआ
अब सियासी हंडिया ये उतार दो
पक चुकी जितनी ये दाल बहुत हुआ
दोगुला अब तो चलन ये चले नहीं
बेहयाई का कमाल बहुत हुआ
क़र्ज़ में अब देश खूब डुबा चुके
आज रूपये का ये हाल बहुत हुआ
देश की जनता है जाग उठी अभी
नोंच लेगी बाल खाल बहुत हुआ