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मंगलवार, 29 मार्च 2011

माँ का हर्द्य

                                                        माँ के  लाडले जंग के मैदान पर 
                                      खरा उतरना है उम्मीदें जहान  पर 
                                      पर माँ तो माँ है बस रास्ता निहारेगी 
                                         फतह कर के आये तो आरती उतारेगी 
                                          चोट खाकर आये तो फिर भी दुलारेगी !!           
                                        

रविवार, 27 मार्च 2011

नभ के सितारे

नटखट चन्द्र ने निशा की माला तोड़ी होगी 
वरना क्यूँ छितराते नभ में इतने सितारे !
उषा ने फिर डाह की लाली भर दी होगी 
वरना क्यूँ बरसाता रवि इतने अंगारे !!
संध्या ने ढांप दिया होगा उसका लावण्य
वरना क्यूँ जाकर परदेश में एसे रात गुजारे !! 
  

शनिवार, 26 मार्च 2011

prakarti ka taandav

कंही सुनामी कंही भूकंप

  

एक म्रदुल बूँद मैं बन जाऊं

जीवन की ये डोर पल में टूट  जायेगी 
किसको पता था प्रकृति रूठ जायेगी !
कंही सुनामी कंही भूकंप 
हर ओर मच रहा हडकंप 
क्षण भर में चल अचल संपत्ति 
यूँ हाथों से छूट जायेगी 
किसको पता था प्रकुर्ती रूठ जायेगी ! 
विषमताओं के इस दौर में कैसे हाथ बताऊँ मै 
जख्मों से तड़पते सीनों पर कैसे मरहम लगाऊं  मै
शब्दों के कान्धों से कैसे 
अश्कों की अर्थी उठाऊं मै!!
अथाह दुखों के सागर मै 
एक म्रदुल बूँद बन जाऊं मै!!  

गुरुवार, 24 मार्च 2011

होंसला अफ़जाई

राग कभी नहीं फूटता बिन छुए वीणा के तार 
बिन उड़े परिंदा क्या जाने क्या रचा बसा उस पार !!
आगे बढ़ तू मन से कर ले होंसला अफ़जाई 
बिन किये कुछ हाथ न आये 
यही है किस्मत यही खुदाई !!