यह ब्लॉग खोजें

गुरुवार, 21 फ़रवरी 2013

सुषुप्त मन में ?


उफ्फ ये स्वप्न!!
हृदय विदारक
कैसे जन्मा
सुषुप्त मन में ?
रेंगती संवेदनाएं  
कंपकपाएँ
जड़ जमाएं  
भयभीत मन में
अतीत है या
भावी  दर्पण
उथल पुथल है
मन उलझन में
गर वर्तमान  है 
बन के  प्रश्न
 खड़ा हुआ 
नेपथ्य तम में 
क्या स्वप्न जो  
 नयनों में पले
वो भी जले   
आतंकी अगन में  
क्यों  याद नही
रंग सिन्दूरी    
बस रक्त रंग ही
घूमता ज़हन में
जो घुला  है  मेरी  
 रग रग में
क्या वही
 जन्मता
सुषुप्त मन में?
*****************  

17 टिप्‍पणियां:

  1. कौन जाने स्वप्नों में छिपे रहस्य....

    सादर
    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत बढ़िया है आदरेया ॥



    गुत्थी अनसुलझी रहे, उलझे उलझे स्वप्न ।

    लगे लूटने चैन तो , कर दो उलझन दफ्न ।
    कर दो उलझन दफ्न, नहीं राखो तब मन में ।

    करते राखी देह, करे उत्पात बदन में ।

    छोड़ नींद की बात, जाग के कर मत नत्थी ।

    अनदेखी कर सखी, नहीं मतलब की गुत्थी ॥

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुषुप्त मन में रेंगती संवेदनाएं, बन के प्रश्न खड़ा हुआ नेपथ्य तम में,,,

    Recent post: गरीबी रेखा की खोज

    उत्तर देंहटाएं
  4. अद्भुत , अति उत्तम हर शब्द - शब्द में अंतर मन का समावेश बहुत खूब

    मेरी नई रचना


    खुशबू

    प्रेमविरह

    उत्तर देंहटाएं
  5. श्रीमती वन्दना गुप्ता जी आज कुछ व्यस्त है। इसलिए आज मेरी पसंद के लिंकों में आपका लिंक भी चर्चा मंच पर सम्मिलित किया जा रहा है।
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (23-02-2013) के चर्चा मंच-1164 (आम आदमी कि व्यथा) पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं
  6. मन मेन न जाने क्या क्या विचार जन्म लेते रहते हैं ... संवेदनशील रचना

    उत्तर देंहटाएं
  7. इसी भाग में राग जन्मते,
    इसी में घृणा..
    न जाने कैसा खेल रचे है ईश्वर

    उत्तर देंहटाएं
  8. स्वप्नों की माया कौन जान सका है ?

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत आकर्षि‍त करता है स्‍वप्‍न..सुंदर रचना

    उत्तर देंहटाएं
  10. सुन्दर भावनात्मक प्रस्तुति..........!

    उत्तर देंहटाएं
  11. उफ़ ये स्वप्न !! / ह्रदय विदारक / कैसे जन्मा / सुषुप्त मन में ?
    रेंगती संवेदनाएँ / कपकपाएँ / जड़ जमाएँ / भयभीत मन में
    अतीत है या / भावी दर्पण / उथल पुथल है / मन उलझन में
    गर वर्तमान है / बन के प्रश्न / खड़ा हुआ / नेपथ्य तम में
    क्या स्वप्न जो / नयनों में पले / वो भी जले / आतंकी अगन में
    क्यों याद नहीं / रंग सिन्दूरी / बस रक्त रंग ही / घूमता ज़हन में
    जो घुला है मेरी / रग रग में / क्या वही / जन्मता / सुषुप्त मन में?

    @ ... कई-कई बार पढ़ा ...तरह-तरह से समझा, अच्छा लगा।

    उत्तर देंहटाएं
  12. आपकी यह बेहतरीन रचना सोमवार 25/02/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.inपर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  13. सुषुप्त मन की अथाह गहराइयों का पार पाना असम्भव सा लगता है ! मन को आंदोलित करती सशक्त प्रस्तुति !

    उत्तर देंहटाएं