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सोमवार, 18 फ़रवरी 2013

सभ्यता संस्कृति(चौपाई )


सभ्यता और संस्कृति जब तक|  
लौ जीवन की जलती तब तक ||

पत्थर में हीरा पह्चानो|
सद् गुण रुप सकल तुम जानो ||

जल बिन कमल चाँद बिन अंबर
गुण बिन वदन मान मत सुंदर ||

आदर्शों से चलती नैया|
मिट जाएँ तो कौन खिवैया ||

सम सुसंस्कृत  देश है मेरा|
उस पे अखंडता का  बसेरा ||

सभ्यता पहचान हो  जिसकी|
सुसंस्कृति ही जान है उसकी|| 
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14 टिप्‍पणियां:

  1. अत्यंत सुदर ...सुघड़ और सार्थक लेखन ...!!
    बधाई एवं शुभकामनायें राजेश जी ....!!

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  2. सभ्यता पहचान हो जिसकी|
    सुसंस्कृति ही जान है उसकी||

    बहुत उम्दा प्रस्तुति,,,

    recent post: बसंती रंग छा गया

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  3. सभ्यता पहचान हो जिसकी|
    सुसंस्कृति ही जान है उसकी||

    बहुत सुंदर क्या बात हैं ........

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  4. यह तो हमें बचाकर रखना ही होगा, वही हमारे बीज हैं।

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  5. बहुत सुंदर संदेश, बहुत बढ़िया प्रस्तुति

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