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मंगलवार, 25 सितंबर 2012

खोल दूंगी ये तिजौरी


बंद करके रख दिए 
वो पल वो शब्द 
वो वाकये जो आह्लादित   
मलय की सुगंध देते थे ,
मन की तिजौरी में,
और वक़्त की बांह पकड़े 
उड़ चली कल्पना लोक में  
सोचा जब थक जाऊं 
मन वितृष्णा  से भर जाए 
विरक्ति अपने पंजे में 
जकड़ने लगे 
गमों   के बादल 
आँखों में बसेरा कर लें 
जीवन आख्याति 
समापन का रुख करे 
तब खोल दूंगी ये तिजौरी 
और लम्बा श्वांस 
लेकर आत्मसात कर लूँगी 
इस सुगंध को 
नव्य जीवन की ऊर्जा  हेतु !! 

17 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब |

    ऐसा दर्शनशास्त्र पढ़, मनुवा भाव विभोर |
    भरा खजाना याद का, मत कर नादाँ शोर |

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  2. आदरणीया राजेश कुमारी जी बेहद सुन्दर रचना है

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  3. भावमय करते शब्‍द ... बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति।

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  4. बहुत ही बेहतरीन
    भावप्रद रचना..
    :-)

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  5. स्मृति की सुगन्ध मन में सदा के लिये बसी रहे..

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  6. ऊर्जा संचित रहनी चाहिए .... सुंदर प्रस्तुति

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  7. बंद करके रख दिए
    वो पल वो शब्द
    वो वाकये जो आल्हादित
    मलय की सुगंध देते थे ,
    मन की तिजौरी में,
    और वक़्त की बांह पकड़े
    उड़ चली कल्पना लोक में
    सोचा जब थक जाऊं
    मन वित्रष्णा (वितृष्णा)भर जाए ........वितृष्णा
    विरक्ति अपने पंजे में
    जकड़ने लगे
    ग़मो(ग़मों ) के बादल ............ग़मों
    आँखों में बसेरा कर लें
    जीवन आख्याति
    समापन का रुख करे
    तब खोल दूंगी ये तिजौरी
    और लम्बा श्वांस
    लेकर आत्मसात कर लूँगी
    इस सुगंध को
    नव्य जीवन की उर्जा(ऊर्जा ) हेतु !! बहुत बढ़िया रचना है .आभार .

    उत्तर देंहटाएं
  8. वीरेंद्र कुमार शर्मा जी हार्दिक धन्यवाद आपकी सूक्ष्म दर्शिता को मान गए आगे से गंभीरता के साथ पोस्ट करुँगी

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  9. बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना...

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  10. बहुत अच्छा लगा ,आपने हमें मान दिया ,बहुत अच्छा लगा ,परिशुद्ध रचना देख कर .चर्चा मंच पर बिठाने के लिए भी आपका आभार .बढ़िया रचना है आपकी .ये चूक वर्तनी की हम से भी होती है .कई मर्तबा पोस्ट करने की उतावली रहती है कंप्यूटर टाइप भी पूरा साथ नहीं देता है शब्दकोश भी .कोई इंगित करे हमारी गलतियां तो अपना सा लगे है .शुक्रिया .

    ram ram bhai
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    सोमवार, 1 अक्तूबर 2012
    ब्लॉग जगत में अनुनासिक की अनदेखी
    ब्लॉग जगत में अनुनासिक की अनदेखी

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  11. वाह !
    करोड़ की पौटली
    तिजोरी मैं ठूँस ली
    निकाल भी ली
    कम नहीं हुई
    दो करोड़ दे गई !

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  12. बेहतरीन भाव पूर्ण सुंदर प्रस्तुति,,,

    RECECNT POST: हम देख न सके,,,

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  13. वो वाकये जो आल्हादित
    मलय की सुगंध देते थे ,में आह्लादित कर लें ,आल्हादित को .शुक्रिया .रचना बेहद सशक्त है .

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  14. bahut sundar prastuti,"chandn ki khooshbu liye,liye yad ke pankh,bhav prafullit ho gye,mantr ho gye sankh"

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