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रविवार, 23 सितंबर 2012

भावनाओं का दमन,


संवेदनाओं का संकुचन देख रहे हैं 
आदान-प्रदान सब गौण  हुए  
अब ऐसा चलन देख रहे हैं |
स्वार्थ के बढ़ते  दाएरे
जनजन  को छलते देख रहे हैं 
हिंद  का वैभव स्विस बेंकों में 
 हक को जलते देख रहे हैं |
भ्रष्टाचारी को जीवंत
संत ज्ञानी को मरते देख रहे हैं 
अगन उगलते सूरज में
नम धरा झुलसते देख रहे हैं | 
दूध की नदियाँ उनके प्रांगण
ये सूखी प्याली देख रहे हैं 
कनक की रोटी उनके घर में 
ये खाली थाली देख रहे हैं |
देख के विघटित स्वर्ण चिरैया
शत्रु जाल फेंकते देख रहे हैं 
भावी देश की सूरत को हम 
नभ दर्पण में  देख रहे हैं |
        *****

    

21 टिप्‍पणियां:

  1. वाह!
    आपकी इस ख़ूबसूरत प्रविष्टि को कल दिनांक 24-09-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-1012 पर लिंक किया जा रहा है। सादर सूचनार्थ

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  2. कितना कुछ देखना भाग्य में थोप दिया है ईश्वर ने।

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  3. आज के यथार्थ का सटीक चित्रण...

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  4. बहुत बढ़िया दीदी |
    शुभकामनायें ||

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  5. भावनाओं मैं पिरोया देश के प्रति प्यार और वर्तमान पर प्रहार करती तीखी पोस्ट ,बधाई |

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  6. बहुत सुन्दर लिखा है ...!!
    बिलकुल ऐसा ही जीवन हो गया है ...!!
    काश ऋतु बदले ...!!

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  7. वाह राजेश जी...

    कनक की रोटी उनके घर में
    ये खाली थाली देख रहे हैं |
    बेहतरीन अभिव्यक्ति...

    सादर
    अनु

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  8. चारों तरफ़ फैली हताशा निराशा को आपने इस रचना में स्वर देकर गंभीर चिंतन का आयाम पाठकों को सौंपा है।

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  9. वाह: राजेश जी .. यथार्थ का सटीक और सही चित्रण किया है...

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  10. संवेदनाओं का संकुचन देख रहे हैं
    आदान-प्रदान सब गौण हुए
    अब ऐसा चलन देख रहे हैं |
    स्वार्थ के बढ़ते दाएरे, (दायरे )........दायरे
    जन- जन को छलते देख रहे हैं
    हिंद का वैभव स्विस बेंकों में
    हक को जलते देख रहे हैं |

    आम आदमी को पल पल मरते देख रहें हैं ....बढ़िया प्रस्तुति संवेदनाओं से भीगी हुई .

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  11. बहुत सुंदर !
    उल्लू भी नहीं बैठते
    अब तो शाखों पर यहाँ
    बन्दर को अदरख खाते
    हम भी देख रहे हैं !

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  12. वाह ...बेहतरीन प्रस्‍तुति।

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  13. vakayee me aap ne jo likha hai use dushyant ke shabdo me"sach kalpna se aage nikalne lg gye hai" aur meri nazar me"aadmi ab aadmi ko bhun khane lag gye hai......"

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  14. बहुत अच्छी और बेहतरीन प्रस्‍तुति। मेरी नई पोस्ट पर आप का इंतजार है..

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  15. कनक की रोटी उनके घर में
    ये खाली थाली देख रहे हैं |

    बहुत बढ़िया........

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  16. दूध की नदियाँ उनके प्रांगण,
    ये सूखी प्याली देख रहे हैं |

    Very Nice Said..! Thanks 4 sharing.

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  17. बढ़िया प्रस्तुति दीदी |
    बधाई स्वीकारें ||

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