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सोमवार, 10 सितंबर 2012

सपना साकार हुआ ,मेरी पुस्तक का विमोचन (पूर्व मुख्य मंत्री उत्तराखंड)बी सी खंडूरी जी के करकमलों द्वारा सफलता पूर्वक संपन्न हुआ |

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प्रिय मित्रों आज मुझे आप सब को यह बताते हुए अपार हर्ष हो रहा है कि बहुत दिनों से जिस स्वप्न को कार्यान्वित करने में व्यस्त थी वो ८ सितम्बर १२ को सफलता पूर्वक संपन्न हो गया मेरी पुस्तक (कविता संग्रह )ह्रदय के उद्दगार का विमोचन  (पूर्व मुख्य मंत्री उत्तराखंड)बी सी खंडूरी जी के करकमलों द्वारा सफलता पूर्वक संपन्न हुआ|क्यूंकि मैं खंडूरी जी के सिद्धांतों से उनकी छवि से इस कदर प्रभावित थी की दिल से चाहती थी की मेरी पुस्तक का विमोचन उन्हीं के हाथों से हो चाहे कितनी देर हो जाए ।   इन दिनों आप के ब्लोग्स पर भी जाना संभव नहीं हो पा रहा था बहुत अधिक व्यस्तता थी जो इस क्षेत्र में मुझसे अधिक अनुभवी हैं वो मेरी स्थिति समझ सकते हैं हाल ही मैं आयोजित हुए लखनऊ में एक विशाल समारोह के संचालक रविन्द्र प्रभात जी और जाकिर अली रजनीश जी की  मनोदशा मेरे मन में ताजा हो रही थी, आयोजन कि रूपरेखा तैयार करना उसके सफल होने कि हर संभव कोशिश करने में एक अलग उत्सुकता  ,चिंता कि मिली जुली पैठ रहती है मस्तिष्क में अब चूँकि सब कुछ सफलता पूर्वक हो गया तो अपनी ख़ुशी आप सब लोगों से सांझा करना चाहती हूँ कुछ तस्वीरें आपके सामने प्रस्तुत करना चाहती हूँ |आमंत्रण मैंने सभी को फेस बुक के माध्यम से फ़ोन के माध्यम से जितना हो सका सभी को दिया यदि किसी दोस्त तक नहीं पंहुच पाया तो दिल से क्षमा मांगती हूँ। मेरे ब्लॉगर मित्रों में से केवल नूतन गैरोला जी ही पंहुची मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकती उन्हें देखकर मुझे कितनी प्रसन्नता हुई रूपचन्द्र शास्त्री जी स्वास्थ्य ख़राब होने कि वजह से मजबूरी के कारण   आ ना सके  मैंने उनको विशिष्ठ अथिति कि लिस्ट में रखा हुआ था उनका मेसेज पढने के बाद उनकी नेम प्लेट हटा दी गई |अधिक से अधिक मित्रों कि फेस बुक पर बधाई मिली जिनके लिए मैं ह्रदय से आभारी हूँ |
अब आपको कुछ झलकियाँ प्रोग्राम की  दिखाती हूँ --- 
चित्र ----खंडूरी जी को उनके निवास  स्थान पर  आमंत्रण देते हुए -----
   चित्र में बाएं से दायें --उत्तराखंड की उमा (उत्तराखंड महिला एसोसिएशन) की अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार साधना शर्मा  , खंडूरी जी ,मैं ,पिंक शर्ट  में मेरे पति देव वीरेन्द्र सिंह  ,हमारे मित्र के के कृष्नातरे ,कल्पना आत्रे ।
विमोचन के दिन की तस्वीरें ---  खंडूरी जी दीप प्रज्ज्वलित करते हुए ।
  बुके से खंडूरी जी का सम्मान /स्वागत करते हुए ।

विमोचन के पल---- यहाँ एक बड़ी गलती हुई जो आप देख सकते हैं बुक्स रैप करते हुए पांच ही बुक बताई थी क्यूंकि मैंने अपने को नहीं गिना था परन्तु वहां सब गड़बड़ हो गया जब तक  बुक लाते पिक्चर क्लिक हो गई थी पर येबात अच्छी हुई की अमर उजाला वाले कुछ देर से पहुंचे और उनको सही पिक्चर मिल गई 
देखिये अमरउजाला,राष्ट्रिय सहारा और हिन्दुस्तान अखबारों की  कवरेज कटिंग --
कार्यक्रम को  प्रारम्भ करने के लिए माइक संभाला एक जानी मानी पत्रकार और समाज सेविका श्रीमती कृष्णा खुराना जी ने अपने मधुर आवाज और अनुभव से एंकरिंग में सबका दिल जीत लिया ----देखिये एक चित्र उनका ---



कार्यक्रम की मुख्य संचालक श्रीमती साधना शर्मा जी का भरपूर योगदान मिला देखिये एक चित्र उनको सम्मानित करते हुए (मेरे  पुत्र राजीव कुमार द्वारा )
कार्यक्रम के आरम्भ में अपनी मधुर वाणी में सरस्वती वंदना करते हुए -कवयित्री कमलेश्वरी मिश्रा 
उसके बाद मेरी पुस्तक की समीक्षा वरिष्ठ साहित्यकार जिनके गीत आप कई फिल्मों में भी सुनते हैं रतन सिंह जौन    सारी  जी ने की उनके वक्तव्य ने सभी के दिलों पर अपनी छाप छोड़ दी बातों ही बातों में मुझे अपने अनुभव से कुछ अच्छे परामर्श भी दिए देखिये उनका चित्र ---
  जौन सारी  जी के वक्तव्य के बाद मेरा वक्तव्य था देखिये चित्र ----
 विडियो भी देख सकते हैं -----
इसके बाद मेजर जनरल चन्दप्रकाश जी का वक्तव्य हुआ---- ।
उनके बाद बी सी खंडूरी जी का वक्तव्य हुआ 
अपनी सुलझी हुई सोच के साथ मेरी पुस्तक की प्रशंसा में जो भी उन्होंने कहा उससे मेरी लेखनी को नई  ऊर्जा प्राप्त हुई हाँ मैं यहाँ आपको बताना चाहूंगी की खंडूरी जी ने दो दिन पहले मेरी पुस्तक पढ़ी फिर विमोचन का वक़्त दिया इसमें  आप उनके सुलझे हुए विचारों और सिद्धांतों की झलक देख सकते हैं मैं उनका ह्रदय से आभार व्यक्त करती हूँ ।
देखिये उस वक़्त का एक चित्र ---
इसके बाद मोमेंटो /स्म्रति चिन्हों द्वारा मुख्य अतिथि एवं विशिष्ठ अतिथियों का सम्मान किया गया 
खंडूरी जी को मोमेंटो देते हुए मैं ---
देखिये उस वक़्त के चित्र ---
एक अपने सम्मानीय अतिथि को बुके देते हुए मैं खुद 
इस के बाद चायपान का वक़्त आया कुछ चित्र उस वक़्त के 
मुझे बधाई देते हुए खंडूरी जी ----
अपनी ब्लॉगर मित्र नूतन गैरोला जी से मिलते हुए 
  इसी बीच मीडिया  दूर दर्शन और राष्ट्रीय सहारा वाले मुझे बाहर बुलाकर मेरी पुस्तक सम्बन्धी इंटरव्यू लेते हुए 
देखिये चित्र ---
खंडूरी जी को विदा करते हुए ---देखिये चित्र बाहर मीडिया ने घेर लिया ----
पूरे प्रोग्राम में खंडूरी जी ने अपनी मुस्कराहट और अपने व्यक्तित्व से सभी को प्रभावित किया। बहुत अच्छे खुशनुमा माहौल का सभी ने लुत्फ़ उठाया ।
इस तरह इस यादगार दिवस का समापन हुआ ---
अंत में इस कार्यक्रम की मुख्य संचालिका साधना शर्मा जी का आभार व्यक्त करते हुए मैं और मेरे पति 
---आप सब भी होते तो समारोह का मजा और भी ज्यादा होता ।
                                                   इति
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38 टिप्‍पणियां:

  1. आपको ह्रदय से बधाई , संकलन को पढने की लालसा बनी रहेगी.

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    1. हार्दिक धन्यवाद किसी अवसर पर मिलना होगा या आप कभी देहरादून आयें तो पुस्तक जरूर भेंट करुँगी

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  2. वाह! राजेश जी.
    आपकी इस पोस्ट से तो हृदय गदगद हो गया है.
    आपको बहुत बहुत हार्दिक बधाई.
    वीडियो में आप को देख और सुनकर बहुत अच्छा लगा.
    सभी चित्र शानदार हैं.
    डॉ.नूतन जी को आपके समारोह में देख खुशी हुई.
    काश! हम भी वहाँ होते.
    अनंत शुभकामनाएँ जी.

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  3. सफल साधना हो गई, जमा विमोचन रंग |
    खंडूरी जी का सुलभ, सतत समय सत्संग |
    सतत समय सत्संग, गंग की कृपा अनोखी |
    पढ़कर पाठक दंग, जंग कर्नल की चोखी |
    रविकर परम प्रसन्न, पर्व इक पुन: नाधना |
    आऊंगा इस बार, विमोचन सफल साधना ||

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  4. बहुत बहुत बधाई राजेश जी...
    किसने कहा हम वहाँ नहीं थे???
    आपकी हर खुशी में हमें शरीक समझिए ...........
    सादर
    अनु

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  5. आदरेया आपको बहुत-२ बधाई और शुभकामनाये.

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  6. बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!
    तन से अभी भी अस्वस्थ हूँ मगर मन से मैं आपकी पुस्तक के विमोचन में शामिल था!
    पुनः बधाई हो!

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  7. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  8. बहुत-बहुत शुभकामनाएँ...राजेश जी

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  9. बधाई!शुभकामनाएं!
    आपके हृदय के उद्गार हम तक पहुंचे।

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  10. राजेश जी, बहुत बहुत बधाई..और शुभकामनायें इस सफल आयोजन के लिए..

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  11. वाह राजेश कुमारी जी आपको हार्दिक बधाइयाँ आपने पहले पडाव पर कदम रख दिया है ईश्वर आपको ऊंचाइयाँ प्रदान करे और आप इसी तरह लिखतीरहें।

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  12. देखा जागी आँख से,हुआ स्वप्न साकार
    स्वीकारें शुभकामना , अंतस् के उद्गार
    अंतस् के उद्गार ,सफलता हरदम पायें
    गीत गज़ल रस छंद,रचें सुंदर कवितायें
    कर्म जहाँ बलवान,बदलती किस्मत रेखा
    हुआ स्वप्न साकार,खुली आँखों से देखा ||

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    1. अरुण कुमार निगम जी हार्दिक धन्यवाद

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