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मंगलवार, 31 जुलाई 2012

रक्षा बंधन


इक जनयत्री एक ही मूल 
एक डाल के हम दो फूल 
भेज के मुझको पी के घर 
भैय्या  देख जाना भूल 
भले तेरी बहना रहती परदेश 
भूल पाती अपना देश
जब जब नेट पे देखूं तेरा चेहरा 
वही है रक्षा बंधन मेरा 
वहीँ से तेरी बलाएँ लूंगी 
प्यारी सी राखी भेजूंगी 
मेल तू खोल के देखना 
राखी में मुस्काएगी बहना 
 ******

15 टिप्‍पणियां:

  1. राखी पर बहुत ही प्यारी सी रचना..शुभकामनायें इस सुंदर पर्व पर !

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  2. बहुत सुंदर भाव संजोये हैं...हार्दिक शुभकामनायें ..

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  3. कल 02/08/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  4. बहुत प्यारी रचना है………॥रक्षाबंधन की शुभकामनायें।

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  5. वाह ... अनुपम भाव लिए बेहतरीन प्रस्‍तु‍ति

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  6. प्यार भरा है हर लफ्ज़ में......
    राजेश जी बहुत बहुत शुभकामनाये रक्षाबंधन की...
    सादर
    अनु

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  7. बहुत -बहुत सुन्दर
    कोमल भाव लिए रचना..
    बहुत सुन्दर:-)

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  8. सुकोमल भाव लिए सुन्दर सी रचना..रजेश जी बहुत बहुत शुभकामनाये रक्षाबंधन की...

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  9. बहुत सुन्दर और कोमल अहसास...रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनायें!

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  10. भाई बहन के रिश्ते को बहुत खुबसूरत शब्दों में गढ़ा है अपने....

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  11. बहुत ही सुन्दर कविता....Happy Rakshabandhan to you !!!

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  12. बहुत सुन्दर रचना .
    रक्षाबंधन की शुभकामनायें .

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  13. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    श्रावणी पर्व और रक्षाबन्धन की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  14. सुन्दर भाव संयोजन...
    रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनायें

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