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शुक्रवार, 25 मई 2012

अपना गाँव


सुबह सवेरे मंदिर में वो मन्त्रों का   जाप 
सांझ ढले दूर से आती वो ढोलक की  थाप
भोर में कानों में पड़ता वो ग्वालों का  गान 
सांझ ढले चौपालों पर  वो आल्हा की  तान 
बीच गाँव में पीपल की वो ठंडी- ठंडी छाँव
मुंडेर पे बैठे कौवो की वो लम्बी कांव-कांव
ट्यूवैलों में पानी की वो होती  भक- भक
धान कूटते मूसल की वो होती  ठक- ठक
खुली छत पे लेटे हुए वो तारों का देखना 
सर्दी की ठिठुरन में चूल्हे पर हाथ सेंकना 
मक्के की रोटी,लस्सी और सरसों का साग
गर्म-गर्म गुड और गन्ने के रस का झाग 
बहुत याद आते हैं     

18 टिप्‍पणियां:

  1. हाँ.....
    वो नानी की कहानियां भी......

    सुंदर भाव,,,

    सादर

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  2. सच में ........ये सब बहुत याद आता है ...!!
    सुंदर रचना ..
    शुभकामनायें

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  3. जब वो पुरानी बातें बहुत याद आती है...तब बहुत अच्छा लगता है....सुन्दर रचना...

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  4. पिंडा विच दिल होर यार बसदा वे ,
    सांझी जिंदगानी ,संस्कार बसदा वे ....
    मापियाँ दा लाड ,बेसुमार बसदा वे ....
    अब तो यादों में गाँव हैं ......सुन्दर सृजन

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  5. अब तो वे सब किसी दूसरी दुनिया की बातें लगती हैं -वह माधुर्य जीवन से सदा को चला गया !

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  6. अब कहाँ ये गाँव..बस यादें ...

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  7. गाँव की सीधी सच्ची तस्वीर उभारी है आपने इस कविता में...बहुत मनोहारी दृश्य !

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  8. सीधे सादे शब्दों में छिपे हुए बहुत ही कोमल भाव
    really mesmerising
    thank u mam

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  9. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  10. बहुत सुंदर मन के भाव ...
    प्रभावित करती रचना .

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  11. सच कहा .... ह्रदय में बसी हैं वे समृतियाँ

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  12. मक्के की रोटी,लस्सी और सरसों का साग
    गर्म-गर्म गुड और गन्ने के रस का झाग
    बहुत याद आते हैं
    और गाँव के लोग शहर के उजाड़ में याद बहुत आतें हैं ,बढ़िया प्रस्तुति ,शानदार .. .कृपया यहाँ भी पधारें -
    रविवार, 27 मई 2012
    ईस्वी सन ३३ ,३ अप्रेल को लटकाया गया था ईसा मसीह
    .
    ram ram bhai
    को सूली पर
    http://veerubhai1947.blogspot.in/
    तथा यहाँ भी -
    चालीस साल बाद उसे इल्म हुआ वह औरत है

    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/

    उत्तर देंहटाएं
  13. और गाँव के लोग शहर के उजाड़ में याद बहुत आतें हैं ,बढ़िया प्रस्तुति ,शानदार .. .कृपया यहाँ भी पधारें -
    रविवार, 27 मई 2012
    ईस्वी सन ३३ ,३ अप्रेल को लटकाया गया था ईसा मसीह
    .
    ram ram bhai
    को सूली पर
    http://veerubhai1947.blogspot.in/
    तथा यहाँ भी -
    चालीस साल बाद उसे इल्म हुआ वह औरत है

    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/

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  14. गाँव का बहुत ही सजीव और सुन्दर चित्रण किया है...
    सच में ये सारी चीजे बहुत याद आती है...
    बहुत ही बेहतरीन रचना....

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  15. सर्दी की ठिठुरन में चूल्हे पर हाथ सेंकना
    मक्के की रोटी,लस्सी और सरसों का साग
    गर्म-गर्म गुड और गन्ने के रस का झाग
    बहुत याद आते हैं ....

    Ah! Mouth watering creation...

    .

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