यह ब्लॉग खोजें

मंगलवार, 22 मई 2012

कुछ क्षणिकाएं(मेरे ख़याल )


कुछ क्षणिकाएं (मेरे ख़याल )
()
कई दिनों से 
सफ़ेद चादर के फंदे ने 
गला घोंट रखा था 
आज धूप से गले  मिलकर 
खुल के रोये चिनार
()
आज सिसकियाँ सुनी
 तो पता चला 
कि इस घर की बुनियाद 
ही आसुओं में मिलाई हुई 
कंक्रीट से भरी थी 
()
हाथी दांत की चूड़ियाँ
बाजार में देखी तो ख़याल आया 
कि कहीं कल इंसान 
की अस्थियों के लाकेट
तो नहीं जायेंगे बाजार में 
()
आज क्यूँ इसकी गर्दन 
झुकी है 
कल ही तो इस फूल ने 
खिलने का वादा किया था मुझसे 
कौन आया था यहाँ ??
()
आज मेरी छाँव में बैठ लो दोस्तों 
कल तो टुकड़े- टुकड़े  होकर 
किसी शहर चला जाऊँगा 
ढूँढना हो तो ढूँढ लेना
किसी के स्वागत कक्ष में 
तुमको गोदी में बड़े प्यार से बिठाऊंगा 
()
तेरी इस ग़ज़ल के कुछ शब्दों से 
लहू रिस रहा है 
लगता है कहीं से बहुत बड़ी 
चोट खाकर आये हैं 
तभी तो दर्द से बरखे 
यूँ फडफडा रहे हैं 
()
दिल में पड़े दर्द के जालों ने कहा 
अब तो संभल लो 
पाँव के रिसते हुए छालों ने कहा 
अब रास्ता बदल लो 
*******


35 टिप्‍पणियां:

  1. आज सिसकियाँ सुनी
    तो पता चला
    कि इस घर की बुनियाद
    ही आसुओं में मिलाई हुई
    कंक्रीट से भरी थी ……………वाह बहुत सुन्दर क्षणिकायें ………सभी एक से बढकर एक्।

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत खूबसूरत और कड़वी सच्चाई से रूबरू कराते आप के ख्याल ...
    और ख्यालों में आप के सवाल ..?
    मुबारक हो !
    आप की लेखनी को
    शुभकामनाएँ!

    उत्तर देंहटाएं
  3. बेहतरीन अंदाज़..... सुन्दर
    अभिव्यक्ति.....

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह वाह वाह.................

    बहुत सुंदर क्षणिकाएँ...........

    आज क्यूँ इसकी गर्दन
    झुकी है
    कल ही तो इस फूल ने
    खिलने का वादा किया था मुझसे
    कौन आया था यहाँ ??

    सभी बेहतरीन.......................

    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  5. अति सुन्दर क्षणिकाएँ........
    सभी बेहतरीन क्षणिकाएँ है.....

    उत्तर देंहटाएं
  6. नैशार्गिक रचना .... आत्मिक बल प्रदान करती हुयी .... शुभ कामनाएं....

    उत्तर देंहटाएं
  7. हाथी दांत की चूड़ियाँ
    बाजार में देखी तो ख़याल आया
    कि कहीं कल इंसान
    की अस्थियों के लाकेट
    तो नहीं आ जायेंगे बाजार में ... हो सकता है या हो भी गया हो

    उत्तर देंहटाएं
  8. आज क्यूँ इसकी गर्दन
    झुकी है
    कल ही तो इस फूल ने
    खिलने का वादा किया था मुझसे
    कौन आया था यहाँ ??

    उफ़ ! गहन अभिव्यक्ति ।

    उत्तर देंहटाएं
  9. सभी क्षणिकाएं बहुत सुन्दर हैं....आभार

    उत्तर देंहटाएं
  10. गहन एवम सुंदेर श्रणिकायॅ ...आभार ...!

    उत्तर देंहटाएं
  11. हाथी दांत की चूड़ियाँ
    बाजार में देखी तो ख़याल आया
    कि कहीं कल इंसान
    की अस्थियों के लाकेट
    तो नहीं आ जायेंगे बाजार में
    ...अब इससे आगे विचार कणिकाएं क्या होंगी ,लाज़वाब कर दिया आपने . .....कृपया यहाँ भी पधारें -

    ये है बोम्बे मेरी जान (अंतिम भाग )
    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/
    ये है बोम्बे मेरी जान (अंतिम भाग )
    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/2012/05/blog-post_22.हटमल
    ram ram bhai
    मंगलवार, 22 मई 2012
    :रेड मीट और मख्खन डट के खाओ अल्जाइ -मर्स का जोखिम बढ़ाओ
    http://veerubhai1947.blogspot.in/

    उत्तर देंहटाएं
  12. खूबसूरत क्षणिकाएं ..एक से बढ़कर एक ..
    ज़िन्दगी को छूती

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत सशक्त क्षणिकाएं हैं...तीसरी क्षणिका ने सोचने पर मजबूर कर दिया...

    नीरज

    उत्तर देंहटाएं
  14. आज क्यूँ इसकी गर्दन
    झुकी है
    कल ही तो इस फूल ने
    खिलने का वादा किया था मुझसे
    कौन आया था यहाँ ??
    बहुत ही सशक्‍त भाव लिए उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  15. हाथी दांत की चूड़ियाँ
    बाजार में देखी तो ख़याल आया
    कि कहीं कल इंसान
    की अस्थियों के लाकेट
    तो नहीं आ जायेंगे बाजार में ..

    बहुत ही संवेदनशील रचना ... गहराई मिएँ जा के लिखी हैं सब क्षणिकाएं ... जीवन कों देखने का नया द्रिस्तिकों है ये रचना ...

    उत्तर देंहटाएं
  16. बहुत बढ़िया शब्दचित्र प्रस्तुत किये हैं आपने!

    उत्तर देंहटाएं
  17. बहुत ही गहरे उतरती क्षणिकायें..

    उत्तर देंहटाएं
  18. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 24 -05-2012 को यहाँ भी है

    .... आज की नयी पुरानी हलचल में .... शीर्षक और चित्र .

    उत्तर देंहटाएं
  19. बहुत हीं सुन्दर क्षणिकाएं....

    उत्तर देंहटाएं
  20. सभी क्षणिकाएं सिर्फ पढ़ने में सुंदर नहीं, ढेरों ज्ञान समेटे हैं अपने अंदर

    उत्तर देंहटाएं
  21. कहीं कल इंसान
    की अस्थियों के लाकेट
    तो नहीं आ जायेंगे बाजार में
    इन पंक्तियों में दर्द भरा है, जो आक्रोश भरा है उसकी अभिव्यक्ति इस बिम्ब के माध्यम से काफ़ी सशक्तता से अभिव्यक्त हो रहा है।

    उत्तर देंहटाएं
  22. हर क्षणिका गंभीरता लिए हुये .... हाथी दाँत के कंगन हों या लकड़ी से बना फर्नीचर .... बहुत उम्दा

    उत्तर देंहटाएं
  23. बहुत ही बेहतरीन रचना....
    मेरे ब्लॉग

    विचार बोध
    पर आपका हार्दिक स्वागत है।

    उत्तर देंहटाएं
  24. सभी क्षणिकाएं गंभीर बात कहने में सक्षम ..... भले ही वो हाथी दाँत की चूड़ी की बात हो या फर्नीचर की

    उत्तर देंहटाएं
  25. कई दिनों से
    सफ़ेद चादर के फंदे ने
    गला घोंट रखा था
    आज धूप से गले मिलकर
    खुल के रोये चिनार..
    ......जीवित कर दिया आपने नज़ारा ......बहुत ही सुन्दर कल्पना राजेशजी

    उत्तर देंहटाएं
  26. कई दिनों से
    सफ़ेद चादर के फंदे ने
    गला घोंट रखा था
    आज धूप से गले मिलकर
    खुल के रोये चिनार

    ....बहुत खूब ! सभी क्षणिकाएं लाज़वाब...

    उत्तर देंहटाएं
  27. आज सिसकियाँ सुनी
    तो पता चला
    कि इस घर की बुनियाद
    ही आसुओं में मिलाई हुई
    कंक्रीट से भरी थी
    ये खास पसंद आई .
    वैसे सभी क्षणिकाएं भावपूर्ण हैं.

    उत्तर देंहटाएं
  28. दिल में पड़े दर्द के जालों ने कहा
    अब तो संभल लो
    पाँव के रिसते हुए छालों ने कहा
    अब रास्ता बदल लो
    rasta badalne ki jarurat nhi hai ji, bahut pyar likhti hai .sadar naman 1

    उत्तर देंहटाएं
  29. लिखते बहुत हैं
    मैं भी वो भी
    पर एक अच्छी कविता
    है प्रसव पीड़ा सी ही

    उत्तर देंहटाएं
  30. जीवन की सार्थक अभिव्‍यक्ति लिए हुए सुन्‍दर रचनाएं।

    उत्तर देंहटाएं