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शुक्रवार, 18 मई 2012

रंगों का राजा



खोल दिए पट श्यामल अभ्रपारों ने 
मुक्त कर  दिए वारि बंधन 
नहा गए उन्नत शिखर 
धुल गई बदन की मलिनता 
दमक उठे हिमगिरी 
झूम उठी घाटियाँ 
थिरक  उठी वादियाँ 
लहरा गई नीली चुनरिया 
अम्बर की छाती पर| 
ठहरी -ठहरी सी तरंगिणी
बह चली द्रुत गति से 
बल खाती हुई 
गुनगुनाती हुई

                            पत्थरों के संग                                                                          
                         अठखेलियाँ करती हुई                                                                                                                                                                  
मैं चुपके से अपनी अंजुरी में 
रंगों को समेटे 
बाहर आया
पड़ गई  मयूर की प्यासी नजर,
अपनी प्रेयसी को रिझाने, 
के लिए अपने पंखों 
का श्रृंगार करने के लिए, 
मुझसे कुछ रंग मांग कर ले गया |
 उसका रोम रोम झूम उठा
  अपने नृत्य से
सारी प्रकृति को  मन मोहित कर दिया
 ,पल्लवों ने
झूम झूम कर करतल ध्वनी की|
शाखाओं ने
एक दूजे को बाहों में लेकर
 बधाईयाँ दी 
ना जाने कहाँ से 
एक छोटी सी चंचल 
तितली मेरे रंगों में 
अपने नन्हें नन्हें पंख 
डुबोकर इतराती इठलाती 
एक पुष्प की गोदी में बैठ कर बोली 
रंगों का राजा आया है 
तुम भी अपना सोलह श्रृंगार करलो:
सारी प्रकृति में बात फ़ैल गई 
मैंने अपना बचा रंग सारी 
प्रकृति में वितरित कर दिया 
और फिर विस्मित  आँखों से 
धरा के उस आलौकिक 
रूप को देखता ही रह गया  
और उस महान चित्रकार को 
जिसकी कला में मैंने रंग भरा 
नमन करते हुए
 चल दिया अपनी राह
फिर से रंग समेटने 
और इंतज़ार करने 
की कब कोई मेघ श्रंखला  
 अपने बंधन खोलेगी 
 और हिमगिरी 
की घाटियाँ मेघ मल्हार 
गायेंगी और प्रकृति 
नृत्य करेगी |
 और मैं मुस्कुराता हुआ
 फिर किसी दिशा में निकल आऊंगा
,अपने रंग बिखेरने 
चुपके से  |  
#####

20 टिप्‍पणियां:

  1. अरे वाह ...यही प्रभु की लीला है ....
    मेरे ब्लॉग पर भी रंगों की छटा है आज ....!
    कमाल है जी ....
    बहुत बहुत मंगलकामनाएं राजेश जी ....!

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  2. लाज़वाब...बहूत ही उत्कृष्ट अभिव्यक्ति..आभार

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  3. शब्दों की अद्भुत छटा बिखेरी है आपने..

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  4. लाजबाब रचना लिखी आपने ,..अच्छी प्रस्तुति
    MY RECENT POST,,,,फुहार....: बदनसीबी,.....

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  5. इतराती इठलाती सी प्यारी सी रचना ।

    उत्तर देंहटाएं
  6. लाजबाब रचना .... उत्कृष्ट अभिव्यक्ति..आभार

    उत्तर देंहटाएं
  7. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  8. फिर से रंग समेटने
    और इंतज़ार करने
    की कब कोई मेघ श्रंखला
    अपने बंधन खोलेगी
    और हिमगिरी
    की घाटियाँ मेघ मल्हार
    गायेंगी और प्रकृति
    नृत्य करेगी ....

    very impressive...

    .

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  9. प्रकृति का प्रकृतिमय चित्रण

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  10. वाह ...बहुत ही बढि़या।

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  11. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  12. बहुत प्यारी सी सुन्दर अभिव्यक्ति...

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  13. बहुत प्यारी और सार्थक प्रस्तुति....बहुत ही सुन्दर चाह सब ओर रंग बिखेरने की..आभार

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  14. ये रंग न हों तो ज़िन्दगी बेरंग है।

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  15. कब कोई मेघ श्रंखला
    अपने बंधन खोलेगी
    और हिमगिरी
    की घाटियाँ मेघ मल्हार
    गायेंगी और प्रकृति
    नृत्य करेगी ...

    Beautiful expression...

    .

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