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सोमवार, 1 अप्रैल 2013

अप्रैल फूल(हास्य व्यंग्य )


फूलों  को तू सूंघ मत ,आज अप्रैल फूल|
हो सकता है फूल में  ,हो मिर्ची की धूल||

 आज अप्रैल फूल है ,नहीं बोलती झूठ| 
  पिया जो मायके गया ,मैं जाउंगी रूठ|| 

तू देख वतन पश्चिमी ,कितने होते धूर्त| 

मूर्ख दिवस देकर हमें ,कहते हमको  मूर्ख||

नेता को देखो सड़क ,गलत कर रहा पार|
अंधे ने बाहें पकड़ ,बचा लिया सरकार||

हाथी बोला गर्व से ,मैं तगड़ा  ढीठ|
चूजा बोला  मैं बड़ा ,बैठा तेरी पीठ||

      नब्बे प्रतिशत मूर्ख हम ,दस प्रतिशत बेकार| 
    फिर मूर्खों के देश में ,क्यों करते व्यापार||

      कौवों  में प्रतियोगिता ,रखते अपनी बात|
     उल्लू बैठा सो रहा ,जगता सारी रात||

   बूढ़े तोतों से  भरी ,देख पेड़ की डाल
      युवा देखें टुकर-टुकर,मन में उठे सवाल
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12 टिप्‍पणियां:

  1. हा-हा बहुत खूब ! अप्रैल फूल की आड़ में सभी की सही तरीके से खबर ले ली !

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  2. मूर्ख दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं...

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  3. हा हा हा हा ! हास्य में भी गंभीर बातें।

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  4. नेता को देखो सड़क ,गलत कर रहा पार|
    अंधे ने बाहें पकड़ ,बचा लिया सरकार||BAHUT KHUB
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  5. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुतीकरण.....आभार.

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  6. नेता को देखो सड़क ,गलत कर रहा पार|
    अंधे ने बाहें पकड़ ,बचा लिया सरकार|..

    अप्रैल फूल के साथ सभी हास्य-व्यंग के धारे लाजवाब ...
    मज़ा आ गया जी ...

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