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सोमवार, 22 अप्रैल 2013

अर्थ दिवस



निज स्वारथ में जो किये ,जल संसाधन व्यर्थ।   
भुगतोगे उसकी सजा ,कहे अनुर्वर अर्थ  
कभी कभी लगता है 
नारी  भी एक धरा है
उसमे  भी कई सागर निहित हैं 
स्नेह सागर ,धैर्य सागर ,प्रेम सागर 
सहनशीलता, सहिष्णुता सागर 
उनमे  भी ज्वार भाटा आता है 
वहीँ किसी कौने में सुनामी भी छुपी होती है 
मत लो परीक्षा उसके धैर्य की 
वर्ना विदीर्ण हो जाएगा उसका ह्रदय 
और सब कुछ खींच लेगा 
तुम्हारी जिन्दगी से 
जैसे राम की जिन्दगी से 
सीता को खींच लिया था इस धरा ने  
प्रेम करना सीखो हिफाजत करो इस धरा की 
अगर जिंदगी खुशहाल चाहते हो तो  
                            अर्थ दिवस की शुभकामनायें
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21 टिप्‍पणियां:

  1. सार्थक रचना.....
    बधाई राजेश जी..
    सादर
    अनु

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  2. सारगर्भित रचना ...राजेश जी ..!!

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  3. स्त्री के गुणों को उकेरती बहुत सुन्दर प्रस्तुति
    latest post सजा कैसा हो ?
    latest post तुम अनन्त
    l

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति..!
    --
    शस्य श्यामला धरा बनाओ।
    भूमि में पौधे उपजाओ!
    अपनी प्यारी धरा बचाओ!
    --
    पृथ्वी दिवस की बधाई हो...!

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  5. अर्थ दिवस की शुभकामनायें,बहुत सुन्दर व सारगर्भित प्रस्तुति

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  6. पर्यावरण प्रेम से संसिक्त रचना नारी का सम्मान पृथ्वी का ही सम्मान है हमारे नागरिक बोध का आईना बनता है .

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  7. पर्यावरण प्रेम से संसिक्त रचना नारी का सम्मान पृथ्वी का ही सम्मान है हमारे नागरिक बोध का आईना बनता है .बेहद सार्थक रचना चर्चा मंच में हमें बिठाने का शुक्रिया दिल से .

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  8. सुंदर अनुभूति अभिव्यक्ति
    सुंदर रचना
    उत्कृष्ट प्रस्तुति

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  9. सुन्दर.विचारणीय प्रस्तुति जिम्मेदारी से न भाग-जाग जनता जाग" .महिला ब्लोगर्स के लिए एक नयी सौगात आज ही जुड़ें WOMAN ABOUT MANजाने संविधान में कैसे है संपत्ति का अधिकार-2

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  10. धरती माँ को सहेजना हमारी साझी जिम्मेदारी है ...सुंदर कविता

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  11. सार्थकता लिये सशक्‍त रचना ....
    आभार

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  12. सच कहा है ... नारी भी धारा ही तो है ... आज उसकी भी अग्नि परीक्षा हो रही है .. ..

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  13. धरा हरी भरी रहे तो ही मानव खुशहाल रहेगा..सुंदर भाव !

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  14. कब तक धरती माँ को दर्द देते रहेंगे ....अब अपनी जिम्मेदारी निभाने की बारी है ....सार्थक रचना

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  15. कब तक धरती माँ को दर्द देते रहेंगे ....अब अपनी जिम्मेदारी निभाने की बारी है ....सार्थक रचना

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