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सोमवार, 23 मई 2011

गरीबी का सूरज

                                    सूखे अधरों पर मुस्कान आँखों में रंगत आई 
                        जब रसोई से आज, धुआं उठता दिया दिखाई !
                        काले पतीले में माँ चमचा आज चलाएगी 
                        मांग के लाई थी  जो चावल 
                         उनसे खीर बनाएगी !
                        भूख से सिकुड़ी आँतों में जब थोड़ी आस बंध आई 
                        लार  टपकाते मरियल कुत्ते ने भी पूँछ हिलाई !
                        सूखेगा आज टपकता छप्पर ,
                        गीला आटा भीगा बिस्तर 
                       देखो देखो सूरज ने अब, काली चादर हटाई 
                       सूखे अधरों पर मुस्कान आँखों में रंगत आई !!
                        
                        

16 टिप्‍पणियां:

  1. Poverty is the biggest problem of India and it really needs urgent attention.
    Nice post !!

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  2. सूखे अधरों पर मुस्कान आँखों में रंगत आई
    जब रसोई से आज, धुआं उठता दिया दिखाई !
    काले पतीले में माँ चमचा आज चलाएगी
    मांग के लाई थी जो चावल
    उनसे खीर बनाएगी !... yah muskaan kitni kimti hoti hai

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  3. वाह!
    बहुत अच्छा चित्रण किया है आपने गरीबी का!
    --
    इस रचना को पढ़कर बाबा नागार्जुन की यादें ताजा हो गई हैं!
    "दाने आये घर के भीतर बहुत दिनों के बाद,
    कौए ने खुजलायी पाखें बहुत दिनों के बाद!"

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  4. काश दो रूपये किलो का वादा निभाया होता तो ऐसे दिन न देखने पड़ते ।
    अति संवेदनशील रचना ।

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  5. अति मार्मिक् रचना ! बहुत अच्छा चित्रण किया है आपने गरीबी का!

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  6. गरीबी को साकार करती मार्मिक रचना

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  7. पहले तो मैं आपका तहे दिल से शुक्रियादा करना चाहती हूँ मेरे ब्लॉग पर आने के लिए और टिप्पणी देकर प्रोत्साहित करने के लिए!
    बहुत मार्मिक रचना ! गरीबी को आपने! बहुत ही सुन्दरता से शब्दों में पिरोया है! उम्दा रचना !

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  8. भूख से सिकुड़ी आँतों में जब थोड़ी आस बंध आई
    लार टपकाते मरियल कुत्ते ने भी पूँछ हिलाई !

    बहुत सुंदर संवेदनशील भाव समेटे हैं राजेश कुमारी जी

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  9. भूख से सिकुड़ी आँतों में जब थोड़ी आस बंध आई
    लार टपकाते मरियल कुत्ते ने भी पूँछ हिलाई !
    बहुत सुंदर रचना।

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  10. सूखे अधरों पर मुस्कान आँखों में रंगत आई !!

    मार्मिक रचना...

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  11. अत्यंत मार्मिक सशक्त कविता ...पहली बार आपके ब्लॉग पर आई और इतना सहृदय लेखन मिला ..!!जुड़ गयी आपके लेखन से ...!!
    आभार .

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  12. .

    Rajesh ji , Very touching creation !....This is the true picture of 40% Indians living below poverty line , but unfortunately there is no one in power to listen to them or feel their pain and hunger.

    .

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  13. टिप्पणी देकर प्रोत्साहित करने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया!

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  14. bhavpoorn avum marmik chitran daridrata ka.... aankhe num kar gaya .

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