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शनिवार, 14 अगस्त 2010

ek shaheed ke naam.today is independence day,we are celebrating,but we should not forgate our soldier's sacrifice

पहाड़ जैसी जिंदगी वो चार दिनों में जी गया
हम दो घूँट पी न सके वो सारा समुंदर पी गया !
वो उन राहों पर दौड़ गया जिन राहों पर हम चल न सके ,
जाते हुए सब को बोल गया की हम आँख में आंसू भर न सके
वो व्यथित ,धहकते सीनों में कुर्बानी के अंकुर बो गया
हम देखते ही रह गए वो तिरंगा ओढ़ कर सो गया !
शोलों से भरा जज्बा पाषाण सा जिगर रखता था
हम बोने बन कर रह गए वो जाते हुए आसमा छू गया !!

4 टिप्‍पणियां:

  1. बन्दी है आजादी अपनी, छल के कारागारों में।
    मैला-पंक समाया है, निर्मल नदियों की धारों में।।
    --
    मेरी ओर से स्वतन्त्रता-दिवस की
    हार्दिक शुभकामनाएँ स्वीकार करें!
    --
    वन्दे मातरम्!

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