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मंगलवार, 20 नवंबर 2012

मेरी डायरी के पन्ने


दिलों में मचलती हुई  तरंगिणी   की  जिन 
लहरों संग डूबते उबरते रहे
वो लहरें आज भी हमें देख मुस्कुराती हैं  
आज भी वो मखमली घास 
सर झुकाकर  हमारे वहां होने की गवाही देती है 
चश्मदीद हैं वो उन पलों की 
जब मेरी गोद में था तुम्हारा सिर
और अपने हाथों से तुम्हारा खेलते खेलते 
उस घास को मरोड़ना 
उसकी शिकायत पर 
अचानक मेरे हाथों से तुम्हारे हाथ को 
ढांप कर रोक देना  
उस  पवन  से मेरी लड़ाई 
जो हमारी नजरों के दरमियाँ 
आकर छेड़ रही थी तुम्हारी  अलकों को 
भिगो रही थी हमारी साँसों की गर्माहट को 
वो नन्हे परिंदे जो हमारे ऊपर से 
उड़ते हुए लौट रहे थे अपने घरों को 
जाते हुए अपने पंखों से 
शुभ विदा कहकर 
अगले दिन मिलने का वादा करते हुए
आज भी मिलने आते हैं 
चाँद जो निकला था बादलों को चीर कर 
तुम्हारी माथे की शिकन को देखकर 
छुप गया था दुबारा बादलों के आँचल में 
जुगनू को भी तुमने छुपा दिया था 
अपने दुपट्टे के कौने में 
आज भी शिकायत करता है 
कुछ् ये थे मेरी डायरी के 
शुरूआती पन्ने !!
बीच के पन्नों में लिखी थी 
व्यस्त जिंदगी कुछ जिम्मेदारियां 
हमारी दो जिंदगियों के साथ दो का और जुड़ना 
उन दो के साथ और दो दो का जुड़ना 
आँगन में किलकारियां 
इस तरह हम दो के साथ और हाथों का जुड़ना 
और एक मजबूत रिश्तों की जंजीर बनना 
एक रिश्तों के मोतियों की बेमिसाल माला का गुंथना 
हमारा भरा पूरा घोंसला जगमगा रहा था उन पन्नो पर 
फिर पन्ने दर पन्ने खुलते गए  चित्र बदलते गए 
घोंसला छोड़ कर वो चिड़ियाँ सब अलग अलग 
दिशा में उड़ चली 
अब डायरी के तीसरे अध्याय में 
हम प्रवेश कर गए 
फिर एक बार हम दोनों अकेले हैं 
बस अपनों की यादें और विशेष अवसरों पर 
अपनों का इन्तजार और जुड़ गया  है इसके पन्नों में  
आज इस डायरी के शुरूआती पन्नों ने 
मुझे अपने पास बुलाया और कहा 
प्रीत की रीत निभाहते हुए
तुम कितनी दूर निकल आये 
कभी लौट कर आओ उसी नदी के किनारे 
वो मखमली दूब  जिसको तुमने समर्पित होना  सिखाया
आज भी तुम्हारे इन्तजार में 
नत मस्तक है
वही लहरें जिनको तुमने पावन चुम्बन की रीत सिखाई 
तुम्हारे कदम चूमने के लिए आतुर हैं 
चले आओ धीरे धीरे एक दूजे को सहारा देते हुए 
जीवन के अंतिम अध्याय में जी लों उन पलों को
समेट  लो उन यादों को और
बना दो सुखान्त इस आख्याति को 
एक बार फिर 
इससे पहले कि सूरज डूब जाए
****************************

21 टिप्‍पणियां:

  1. एक डायरी में सिमट आया पूरा जीवन....
    बहुत सुन्दर राजेश जी.
    सादर
    अनु

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  2. बेहद भावपूर्ण शब्‍दों का संगम ..
    आभार इस उत्‍कृष्‍ट अभिव्‍यक्ति के लिये

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  3. बहुत कोमल भावों को समेटे उम्दा रचना

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  4. बहुत ही प्रभावी रचना, सुन्दर भाव जगाती रचना..

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  5. वाह गहन भाव व्यक्ति करती बेहद शसक्त रचना.

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  6. उत्कृष्ट प्रस्तुति |
    बधाई स्वीकारें ||

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  7. भावमय अभिव्यक्ति..बेहद सुन्दर :)

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  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!........

    उत्तर देंहटाएं
  9. बीच के पन्नों में लिखी थी
    व्यस्त जिंदगी कुछ जिम्मेदारियां
    हमारी दो जिंदगियों के साथ दो का और जुड़ना
    उन दो के साथ और दो दो का जुड़ना ....बहुत सुन्दर दर असल यही जीवन है

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  10. धीरे धीरे एक दूजे को सहारा देते हुए
    जीवन के अंतिम अध्याय में जी लों उन पलों को
    समेट लो उन यादों को और
    बना दो सुखान्त इस आख्याति को
    इससे पहले कि सूरज डूब जाए.
    *
    - जीवन का सार-संक्षेप ,बस यही !

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  11. बहुत सुंदर और भाव प्रबल ....

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  12. मधुर स्मृतियों को समेटे हैं आपकी डायरी के पन्ने...सुंदर !

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  13. बहुत ही गहरे और सुन्दर भावो को रचना में सजाया है आपने.....

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  14. अतीत को खंगालती सुन्दर प्रस्तुति .

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  15. तीसरे अध्याय में पहले दो को याद करके कितनी खुशी मिलती है, सुंदर रचना ।

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