यह ब्लॉग खोजें

बुधवार, 1 फ़रवरी 2012

नेह की वो परिभाषा


तेरे मेरे हिय की वो मूक भाषा 
कलम बद्ध न कर पायेगा कोई 
नेह की वो परिभाषा !
सप्त पदी से से चला वो प्यार का सफ़र 
हमसफ़र जिंदगी का ,हर राह हर डगर 
यूँ ही पूर्ण हो अब शेष,
अविछिन्न अभिलाषा !
तेरे मेरे हिय की वो मूक भाषा !
दिलों को जोड़ता अद्दभुत आकर्षण, 
वो निश्छल ,आसक्त अनुबंध,  
प्रेम का प्रगाढ़ समर्पण
छोड़े न कभी साथ;
चिर अनंत, अन्तः उर की आशा !
तेरे मेरे हिय की वो मूक भाषा !
कलम बद्ध न कर पायेगा कोई
नेह की वो परिभाषा !



28 टिप्‍पणियां:

  1. भाव पूर्ण सुंदर रचना, प्रस्तुति बहुत अच्छी लगी.,

    welcome to my post --काव्यान्जलि--हमको भी तडपाओगे....

    उत्तर देंहटाएं
  2. सच में बहुत मुश्किल है इस नेह को परभाषित करना..बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना..

    उत्तर देंहटाएं
  3. चिर अनंत, अन्तः उर की आशा !
    तेरे मेरे हिय की वो मूक भाषा !
    कलम बद्ध न कर पायेगा कोई
    नेह की वो परिभाषा !...

    Very touching creation...You made me emotional.

    Thanks ma'am.

    regards

    .

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपका ब्लॉग पसंद आया. मैंने अभी हिंदी में लिखना शुरू किया है, आपको आमंत्रित करता हु.
    विरल त्रिवेदी
    फ्रॉम- पाटन गुजरात

    उत्तर देंहटाएं
  5. आपके उत्‍कृष्‍ठ लेखन का आभार ।

    उत्तर देंहटाएं
  6. नेह की परिभाषा आँखों में होती है, कागज पर नहीं लिखी जा सकती ...

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सुन्दर ..हिय की वो मूक भाषा .

    उत्तर देंहटाएं
  8. कैसे शब्दों में ढालेंगे, शब्दरहित उस भाषा को..
    बहुत सुन्दर कविता...

    उत्तर देंहटाएं
  9. सार्थक है ये परिभाषा.....नेह की वो परिभाषा !

    उत्तर देंहटाएं
  10. तेरे मेरे हिय की वो मूक भाषा !
    कलम बद्ध न कर पायेगा कोई
    नेह की वो परिभाषा !
    सार्थक, सुन्दर व बेहतरीन प्रस्तुती ,

    उत्तर देंहटाएं
  11. बेहतरीन निशब्द करती रचना,लाजबाब प्रस्तुतीकरण..

    NEW POST...40,वीं वैवाहिक वर्षगाँठ-पर...

    उत्तर देंहटाएं
  12. लाज़वाब! बहुत सुंदर और भावपूर्ण प्रस्तुति...

    उत्तर देंहटाएं
  13. कल 03/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  14. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    http://charchamanch.blogspot.in/2012/02/777.html
    चर्चा मंच-777-:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

    उत्तर देंहटाएं
  15. सुंदर प्रस्तुति
    तेरे मेरे हिय की वो मूक भाषा
    कलम बद्ध न कर पायेगा कोई
    नेह की वो परिभाषा !

    धन्यवाद |

    नई प्रस्तुति के साथ आकाश कुमार on http://www.akashsingh307.blogspot.in/

    उत्तर देंहटाएं
  16. कविता अच्छी है ..
    kalamdaan.blogspot.in

    उत्तर देंहटाएं
  17. नेह को कलमबद्ध किया भी नहीं जा सकता .सुन्दर!!

    उत्तर देंहटाएं
  18. मन के कागज़ पर भावनाओं से लिखी जाती है नेह की परिभाषा...
    बहुत सुन्दर..

    उत्तर देंहटाएं
  19. चिर अनंत, अन्तः उर की आशा !
    तेरे मेरे हिय की वो मूक भाषा !
    कलम बद्ध न कर पायेगा कोई
    नेह की वो परिभाषा !lajabav.

    उत्तर देंहटाएं
  20. वाह ..बहुत खूबसूरत रचना .. मूक भाषा में नेह की परिभाषा कहती हुई सी ..

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. सप्त पदी से से चला वो प्यार का सफ़र
      हमसफ़र जिंदगी का ,हर राह हर डगर
      यूँ ही पूर्ण हो अब शेष,
      अविछिन्न अभिलाषा !
      Kya gazab likhtee hain aap!
      Comment box nahee khul raha,isliye yahan comment de rahee hun.Kshama karen!

      हटाएं
  21. सप्त पदी से से चला वो प्यार का सफ़र
    हमसफ़र जिंदगी का ,हर राह हर डगर
    यूँ ही पूर्ण हो अब शेष,
    अविछिन्न अभिलाषा !


    bahut hi sundar chitran rajesh ji .....bilkul umda ...badhai sweekaren.

    उत्तर देंहटाएं