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शनिवार, 4 फ़रवरी 2012

तुम्हारी आदत


अभी तक गई नहीं तुम्हारी  आदत 
हर जगह मेरा नाम लिखने की !
वो भी दिन थे 
जब तुम रंग बिरंगी चॉक से 
लिख देते थे मेरा नाम श्यामपट्ट पर 
और उपहास के पात्र बनते थे हमदोनो!
कभी मेरे घर के इर्द गिर्द घूमते हुए 
दीवारों पर 
कभीचुपके से फेंके हुए मेरे आँगन में 
अपने ख़त में ,
 लिख देते थे खून से मेरा नाम !
फिर तुमने उस दिन
 रस्मो रिवाजो की मौजूदगी में 
लिख दिया था मेरा नाम हिना से 
अपनी हथेली पर !
और जाने कितनी चांदनी रातों में 
लिख देते थे चाँद पर उंगली से मेरा नाम !
देखो आज भी उस पत्थर पर
जिसके नीचे मैं सोई हूँ  
लिख रहे हो रंगहीन आंसुओं से 
मेरा नाम !
तुम कहते हो कि 
तुम्हारे रंग खो गए हैं कहीं!
मेरी गुजारिश है तुमसे 
कि आज से तुम अपने दिल पर 
कोई नया नाम लिखो 
धीरे धीरे खोये रंग भी लौट आयेंगे 
और मेरी रूह को चैन भी  मिल जाएगा !


26 टिप्‍पणियां:

  1. तुम कहते हो कि
    तुम्हारे रंग खो गए हैं कहीं!
    मेरी गुजारिश है तुमसे
    कि आज से तुम अपने दिल पर
    कोई नया नाम लिखो
    धीरे धीरे खोये रंग भी लौट आयेंगे
    और मेरी रूह को चैन भी मिल जाएगा !...इसे ही प्यार कहते हैं

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  2. बहुत बहुत सुन्दर....

    वाकई सच्चा प्रेम है ये..
    बहुत भावुक अभिव्यक्ति..
    सादर.

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  3. प्रेम में ऐसी चाह ... इसी को तो प्रेम कहते हैं ... दुसरे ले जीवन में तंग भरने की चाह ...

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  4. रंग मिलेंगे सिर्फ वहीं पर, आखों का पर्दा हटना हो..

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  5. यही तो है सच्चा प्यार
    प्रेम के रस से सराबोर
    बहूत हि सुंदर ,भावूक कर देनेवाली
    अभिव्यक्ती है ....

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  6. आज से तुम अपने दिल पर
    कोई नया नाम लिखो
    धीरे धीरे खोये रंग भी लौट आयेंगे
    और मेरी रूह को चैन भी मिल जाएगा !

    यत्र-तत्र लिखे नामाक्षर जीवन की धुरी बन जाते हैं।

    प्रभावशाली रचना।

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  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति
    आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 06-02-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

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  8. बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........

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  9. बहुत सुन्दर और सार्थक सृजन, बधाई.

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  10. एक सुन्दर भावप्रवण प्रस्तुति |
    आशा

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  11. बेरंग आंसू आपकी गुज़ारिश पर गौर करें...
    आखिर ज़िन्दगी को तो चलते ही रहना है!

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  12. कि आज से तुम अपने दिल पर
    कोई नया नाम लिखो
    धीरे धीरे खोये रंग भी लौट आयेंगे
    और मेरी रूह को चैन भी मिल जाएगा !जीवंत संस्मरण के साथ सार्थक सन्देश भी.......बहुत कुछ कहती हुई रचना एकाकी पन की पीड़ा का भी संकलन बेहद प्रभावशाली रचना राजेश जी बदलते वक्त के साथ नाम लिखना मुमकिन कहाँ हो पता है .....फिल हाल सादर बधाई के साथ सादर आभार भी .

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  13. बहुत गहन..प्रभावपूर्ण रचना...

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  14. कि आज से तुम अपने दिल पर
    कोई नया नाम लिखो
    धीरे धीरे खोये रंग भी लौट आयेंगे
    और मेरी रूह को चैन भी मिल जाएगा !


    बहुत ही भावपूर्ण प्रस्तुति. बधाई.

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  15. बहुत भावपूर्ण ...मन को छूती हुई ...बहुत सुंदर रचना ...
    बधाई .

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  16. प्रेम और समर्पण की अनन्य अभिव्यक्ति जहां स्वयं के मिटने में ही पूर्णता का एहसास है।

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  17. प्रस्तुति अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है । धन्यवाद ।

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