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शनिवार, 24 दिसंबर 2011

कुछ कड़वी क्षणिकाएं



गैरों पे शक करता रहा 
दिल नासमझ निकला 
अपनी जमीं तो खींचने वाला 
कोई अपना ही निकला !

कुछ ऐसी चली गर्म हवा
जिसमे अपनत्व के खंड पिघले 
समझते थे जिन्हें पास 
वो दिल से कोसों दूर निकले !

किसी और से क्या शिकवा 
जीवन में जब अँधेरा होता है 
उजाले में संग चलने  वाला 
साया भी कहाँ होता है !

छुपा के खुद को यादों से 
दर्द में दफ़न कर लिया 
अब ले चलो जनाजा 
हमने तो सफ़र कर लिया !

फंसी हुई थी मैं अपनत्व के जाल में 
हवा के एक ही झोंके ने आजाद कर दिया !




34 टिप्‍पणियां:

  1. आज याद आयी तो आँखों में आंसूं आ गए

    आज याद आयी तो
    आँखों में आंसूं
    आ गए
    कभी मुस्काराते
    रहते थे
    अब खामोश हो गए
    वो साथ
    निभाते निभाते
    चले गए
    हम होश खोते रहे
    शक में बैठे रहे
    उन्हें बदनाम करते रहे
    खुद के हाथों से
    खुद को
    जिबह करते रहे
    निरंतर
    ग़मों को न्योता
    देते रहे
    20-12-2011
    1875-43-12

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  2. छुपा के खुद को यादों से
    दर्द में दफ़न कर लिया
    अब ले चलो जनाजा
    हमने तो सफ़र कर लिया !...बहुत मार्मिक प्रस्तुति..सुन्दर भाव...

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  3. छुपा के खुद को यादों से
    दर्द में दफ़न कर लिया
    अब ले चलो जनाजा
    हमने तो सफ़र कर लिया !

    ...बहुत खूब! सभी क्षणिकाएं दिल को छू जाती हैं.

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  4. सुंदर अभिव्यक्ति.. दिल को छू हर एक पंक्ति....

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  5. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति,...बेहतरीन रचना,....

    "काव्यान्जलि"--नई पोस्ट--"बेटी और पेड़"--में click करे

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  6. अपनों के द्वारा दी गई पीड़ा अधिक दुखदायी होती है।
    भावमयी कविता।

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  7. रिश्तों के कड़वाहट की अच्छी अभिव्यक्ति है ।

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  8. कड़वे से ही रक्त शुद्धि संभव है

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  9. आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल सोमवारीय चर्चामंच http://charchamanch.blogspot.com/ पर भी होगी। सूचनार्थ

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  10. किसी और से क्या शिकवा
    जीवन में जब अँधेरा होता है
    उजाले में संग चलने वाला
    साया भी कहाँ होता है ..

    कड़वा नहीं हकीकत को लिखा है आपने ... सभी यथार्थ के करीब ...

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  11. छुपा के खुद को यादों से
    दर्द में दफ़न कर लिया
    अब ले चलो जनाजा
    हमने तो सफ़र कर लिया !

    फंसी हुई थी मैं अपनत्व के जाल में
    हवा के एक ही झोंके ने आजाद कर दिया !

    सुंदर अभिव्यक्ति

    उत्तर देंहटाएं
  12. फंसी हुई थी मैं अपनत्व के जाल में
    हवा के एक ही झोंके ने आजाद कर दिया !…………ऐसा ही होता है जब अपनो से धोखा मिलता है।

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  13. जीवन के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण को देख अफ़सोस हो रहा है। सारी समस्याएं खुद की बनाई प्रतीत होती हैं।

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  14. sahi kah rahe hain radharaman ji apno se apnatv rakhna moh maya yeh sab samsya hi hai.... because we are humanbeing this is in our nature.

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  15. खूबसूरती से लिखी गयीं कडवी क्षणिकाएँ

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  16. समझते थे जिन्हें पास
    वो दिल से कोसों दूर निकले !

    बहुत सुन्दर क्षनिकाएं...
    सादर बधाई...

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  17. छुपा के खुद को यादों से
    दर्द में दफ़न कर लिया
    अब ले चलो जनाजा
    हमने तो सफ़र कर लिया !

    फंसी हुई थी मैं अपनत्व के जाल में
    हवा के एक ही झोंके ने आजाद कर दिया !

    वह कितनी सुन्दर और प्रेरनादायी क्षणिकाएं पहली बार मै आपके ब्लॉग पर चर्चामंच के माध्यम से पहुच सका हूँ . चर्चा मंच तथा आपको बहुत बहुत आभार | वाकी आपकी पंक्तियाँ मन को प्रभावित करने वाली हैं | कृपया मेरे ब्लॉग पर आने का निमंत्रण स्वीकार करें |

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  18. सुन्दर भाव...सुंदर अभिव्यक्ति

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  19. jeevan me sab kuch nahi milta
    dard bas apna hota hai , chupane se bhi nahi chupta
    najre ban jati hai dil ki juban .......saya bhi phir apna nahi hota ....

    bahut hi sunder prastuti thi rajeshkumari ji . har shabd dil me utarta gaya .

    bahut -bahut badhai . happy new year.

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  20. कुछ ऐसी चली गर्म हवा
    जिसमे अपनत्व के खंड पिघले
    समझते थे जिन्हें पास
    वो दिल से कोसों दूर निकले !

    एक कड़वे सच की सुन्दर अभिव्यक्ति
    vikram7: आ,मृग-जल से प्यास बुझा लें.....

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  21. बहुत बेहतरीन प्रस्तुति|
    नव-वर्ष की शुभकामनाये|

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  22. बेहतरीन प्रस्तुति । मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है । . नव वर्ष -2012 के लिए हार्दिक शुभ कामनाएँ ।

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  23. सुंदर अभिव्यक्ति बेहतरीन रचना,.....
    नया साल सुखद एवं मंगलमय हो,....

    मेरी नई पोस्ट --"नये साल की खुशी मनाएं"--

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  24. SUNDAR RACHANA PRBHAVSHALI ABHIVYKTI ...ABHAR.

    NAV VARSH PR APKO HARDIK BADHAI .

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  25. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति है आपकी.

    नववर्ष की आपको बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएँ.

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  26. कितनी गहरी सोच आपकी,और बहुत सुन्दर है रचना।
    नये वर्ष के नये दिवस पर, आपको मेरी मनोकामना।।

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  27. क्षणिकाएं नहीं हैं ये....
    ये हैं जीवन का कड़वा सच.....

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  28. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

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