यह ब्लॉग खोजें

रविवार, 11 दिसंबर 2011

काला पानी ,सेल्लुलर जेल

अगर आप देश भक्त हैं तो जरूर पढ़े -----


Cellular Jail Slideshow: Rajesh’s trip to मुssoorie, Uttarakhand, India was created by TripAdvisor. See another Mussoorie slideshow. Create a free slideshow with music from your travel photos.aaआज का दिन हमारे लिए ख़ास था !
सेलुलर जेल के विषय में बहुत कुछ सुन और पढ़ रखा था अतः उसको 
पास जाकर देखने की इच्छा थी !
अपने आप को उस वक़्त उस परिस्थिति में आत्मसात करने की हार्दिक  इच्छा थी,सो आज पूरी हो गई !जो कुछ मैंने वहां जाना ,समझा वही आप सब से बाँट रही हूँ !
अंडमान में कुल १८४ छोटे बड़े आईलेंड हैं !सबसे बड़ा और अन्य
 राज्यों के नजदीक पोर्ट ब्लेयर है जो अंडमान की केपिटल बनाया गया है ,यंही पर स्थित है सेलुलर जेल !

   इस जेल का निर्माण १८९६ में शुरू हुआ और १९०९ में पूर्ण हुआ !
इसको बनाने में जो ईंटे प्रयोग की गई वो बर्मा से लाइ गई थी !
बिल्डिंग में सात विंग हैं जो साइकिल के पहिये के आकार में बनाये
गए हैं !सबसे ऊपर एक कमरा है जिसमे बहुत बड़ी घंटी है जो अलार्म का काम करती थी तथा जिससे सातों विंग्स पर नजर रखी जा  सकती थी !



उसमे ६९८ कैद कोठरी हैं जिनका आकार ४.५ -२.७ मीटर है 
हर कोठरी में एक रोशनदान है !एक कैदी दुसरे से बात
 नहीं कर सकता था उसी के ऊपर इसका नाम सेलुलर पड़ा !
सबसे पहले १० मार्च १८५८ में सुप्रिडेंट ज.बी वालकर 
२०० फ्रीडम फाइटर्स के साथ अंडमान में आया 
फिर १८६८ में ७३३ का बेच अप्रैल में आया वहां 
उनको जंगलों में पेड़ों से बांधकर रखा जाता था 
तेज बारिश में जंगलों में कीड़े ,बिच्छुओं ,जोक आदि के साथ
 सड़क बनाने के लिए जंगलों की सफाई कराइ जाती थी !
फिर जेल में स्वतंत्रता सेनानियों को लाने का सिलसिला शुरू हुआ 
उनको तरह तरह की यातनाएं दी जाती थी सब्जी में जंगल की 
बड़ी बड़ी घास को उबालकर खिला देते थे मल मूत्र तक खाने के
 लिए बाध्य करते थे !
फिर हमने रात को लाईट एंड साउंड का प्रोग्राम देखा ---
कुछ चित्र उस वक़्त के ---



यह प्रग्राम बहुत हर्दय स्पर्शी रहा !नाटक के रूप में कुछ इसके अंश प्रस्तुत किये गए ,उसमे एक पीपल के जीवंत पेड़ को सूत्रधार बनाया गया !
यह पेड़ आज भी जेल के प्रांगन में जस का तस खड़ा है !पीपल का यह पेड़ उस समय के सारे द्रश्यों सारी दुःख भरी यादों को अपने में समेटे हुए है 
यह कहता है जाने कितनी आंधिया चली बवंडर आये जो मुझे हिला भी न सके किन्तु जब जब मेरे देश भक्तों की चीखें मेरे कानों में पड़ती थी न जाने कितने पत्ते मेरे थर थर कांपते हुए शरीर से कूद कर आत्महत्या कर लेते थे   
मेरी हर डाल पर बुलबुले बैठ कर देश भक्ति के गीत गाती थी !
मैं दूर से सब कुछ देखता रहता जब मेरे वीर की कमर पर कोड़े बरसते थे तो उसके साथ मैं भी बोलता था बन्दे मातरम !जब वो भूख हड़ताल करते थे मैं अपने पंखों से उनको शुद्ध हवा देकर जिन्दा रखने की कोशिश करता !उनको नया उदय होता हुआ सूरज दिखाता !
उस समय ली गई विडियो के दो क्लिप देखिये अँधेरा बहुत था पर मुश्किल से यह छोटी सी क्लिपिंग कुछ स्पष्ट आई 
   video
    जैसे जैसे प्रोग्राम चल रहा था लोगों के दिल में देशभक्ति की भावना व 
गुस्सा भी भरता जा रहा था सभी के मन में यही बात आ रही थी की कितनी क़ुरबानी कितनी यातनाएं सह कर हमने यह आजादी पाई और आज हमारा देश कितने भ्रष्ट ,कितने बेईमान ,मक्कार हाथों में चला गया 
है काश आज इन लोगों के लिए यह सेलुलर फिर खुल जाये !!!
हमारी   सरकार के पास तो आज तक यह आंकड़े भी नहीं हैं की इस सेलुलर में कितने देशभक्त कैदी रखे गए हैं पर कोशिश करें तो ब्रिटिशर्स 
के पास जरूर होंगे !इस तरह इस प्रोग्राम को देख कर भारी मन से कुछ यादें साथ लेकर हमने अपनी यात्रा समाप्त की !आप भी कभी अंडमान जाएँ तो सेलुलर जेल अवश्य देखिये !  

18 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत कुछ बताया है आपने,

    अपना चक्कर देखते है कि कब लग पाता है?

    उत्तर देंहटाएं
  2. रौंगटे खडे करने वाला विवरण …………सच कहा आज क्या हाल किया है मेरे देश का इन नेताओं ने…………सुनिये इसे भी मै लिंक दे रही हूं कैसे सब अपनी अपनी तरह धिक्कार रहे है मगर इन पर असर नहीहै।
    http://www.youtube.com/watch?feature=player_detailpage&v=1JTsP5lzMMY

    इसे सुनियेगा जरूर ………यू ट्यूब का लिंक है।

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 12-12-2011 को सोमवारीय चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  4. अंग्रेजों के ज़ुल्म की गाथा सुनाती है सेल्युलर जेल ।
    बहुत दुःख हुआ था कोल्हू और फाँसीघर देखकर ।

    उत्तर देंहटाएं
  5. वीरों की पीड़ा अब भी वहाँ बसती होगी, सुनायी भी देते होंगे अंग्रेजों के अट्टाहस स्वर।

    उत्तर देंहटाएं
  6. और देखिए,कितने चलताऊ तरीक़े से हम कह देते हैं कि आज के ज़माने से अच्छा तो अंग्रेज़ी राज था!

    उत्तर देंहटाएं
  7. बोलते चित्र सुन्दर.जानकारियाँ..

    उत्तर देंहटाएं
  8. .

    rongte khade ho gaye....

    A very important post. Thanks ma'am.

    .

    उत्तर देंहटाएं
  9. काला पानी और इस कल को ससोच के वीर सावरकर की याद ताज़ा हो जाती है ... फोटो बहुत कमाल हैं आपकी ...

    उत्तर देंहटाएं
  10. सुंदर प्रस्तुति.बधाई....
    मेरी नई पोस्ट...


    सब कुछ जनता जान गई ,इनके कर्म उजागर है
    चुल्लु भर जनता के हिस्से,इनके हिस्से सागर है,
    छल का सूरज डूब रहा है, नई रौशनी आयेगी
    अंधियारे बाटें थे तुमने, जनता सबक सिखायेगी,

    आपका स्वागत है
    ________________

    उत्तर देंहटाएं
  11. सेलूलर जेल का वर्णन सावरकर जी के किताब में भी आता है । अंग्रेजी राज की तारीप करने वाले शायद कभी अंदमान नही गये । सुंदर प्रस्तुति ।

    उत्तर देंहटाएं
  12. कालापानी नाम की यह जगह आजकल पयर्टन स्थल बन गयी है| देश के वीरों को नमन ..........

    उत्तर देंहटाएं
  13. बोलती हुई और सजीव चित्रों के साथ जानकारी से भरपूर बहुत ही बढ़िया और उम्दा प्रस्तुती!

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत मार्मिक एवं हृदयस्पर्शी संम्स्मरण !

    उत्तर देंहटाएं
  15. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  16. Woah! I'm really loving the template/theme of this blog. It's simple,
    yet effective. A lot of times it's tough to get that "perfect balance" between usability and visual appearance. I must say you've done a excellent job with this.
    In addition, the blog loads extremely fast for me on Safari.
    Outstanding Blog!

    my page; taken from

    उत्तर देंहटाएं