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मंगलवार, 20 दिसंबर 2011

कविता

कल्पना की पराकाष्ठा
अन्तरिक्ष को छू कर आई कविता !
कवियों की नन्ही जान,
शब्दों में मुस्काई कविता !
कभी दोहा, कभी छंद 
कभी ग़ज़ल कभी गीत अनुबंध 
हर रूप में समाई कविता
हिंदी  साहित्य के सागर  में 
डूब के नहाई कविता 
अन्तरिक्ष को छू कर आई कविता !
पञ्च तत्वों की ओढ़ चुनर 
फसलों संग लहराई कविता 
फूल फूल पर कलि कलि पर 
तितली बन इठलाई कविता !
अन्तरिक्ष को छू कर आई कविता !
राजनीति के गलियारों में
 सेंध लगा कर आई कविता 
भ्रष्टाचार के सड़े फूंस  में 
आग लगा कर आई कविता !
अन्तरिक्ष को छू कर आई कविता !
शहीद स्मारक के क़दमों में 
दीप जला कर आई कविता 
देशप्रेम का जयकारा कर 
तिरंगा फहरा कर आई कविता !
अन्तरिक्ष को छू कर आई कविता !!

   

37 टिप्‍पणियां:

  1. शहीद स्मारक के क़दमों में
    दीप जला कर आई कविता
    देशप्रेम का जयकारा कर
    तिरंगा फहरा कर आई कविता !
    अन्तरिक्ष को छू कर आई कविता !!....बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति..

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  2. ग़ज़ब की कविता ... कोई बार सोचता हूँ इतना अच्छा कैसे लिखा जाता है

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  3. बहुत सुन्दर भावो को संजोया है।

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  4. अक्सर जीवन में भी कविता महकती रहती है ... ऐसे ही इठलाती रहती है ...

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  5. पञ्च तत्वों की ओढ़ चुनर
    फसलों संग लहराई कविता ...बहुत ही खूबसूरत भाव

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  6. सबके मन को भाई कविता
    हमको बहुत पसंद आई कविता

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  7. वाह ...पक्तियां तो बहुत ही खुबसूरत हैं

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  8. बहुत खुबशुरत सुंदर रचना,कुछ पन्तियों का जबाब नहीं,बेहतरीन पोस्ट,.

    मेरी नई पोस्ट के लिए काव्यान्जलि मे click करे

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  9. फूल फूल पर कलि कलि पर
    तितली बन इठलाई कविता !

    वाह! आपकी कविता तो कमाल करती है जी.
    मृदु,सौम्य,सरल ,कठोर सभी भावों को व्यक्त करती.
    सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.

    मेरी नई पोस्ट पर आपका स्वागत है.

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  10. बहुत उम्दा रचना!
    --
    आपकी प्रवि्ष्टी की चर्चा कल बृहस्पतिवार 22-12-2011 के चर्चा मंच पर भी की या रही है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल उद्देश्य से दी जा रही है!

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  11. कभी दोहा, कभी छंद
    कभी ग़ज़ल कभी गीत अनुबंध
    हर रूप में समाई कविता
    हिंदी साहित्य के सागर में
    डूब के नहाई कविता

    वाह !!!बहुत ही सुंदर कविता........

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  12. bahut sundar tarike se kavita ko varnit kiya gaya hai..
    sundar abhivyakti..

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  13. कविता बहुआयामी है सही है |उन्दा अभिव्यक्ति |
    आशा

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  14. अद्भुत सुन्दर कविता! शानदार और भावपूर्ण प्रस्तुती!

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  15. कितनी सुंदर बन आयी कविता...

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  16. कभी दोहा, कभी छंद
    कभी ग़ज़ल कभी गीत अनुबंध
    हर रूप में समाई कविता

    बहुत ही सुन्दर...
    सादर बधाई

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  17. एक कवि के ह्रदय से निकली कविता .......

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  18. बहुत ही ख़ूबसूरत प्रस्तुति..लय, शब्दों और भावों का अद्भुत संयोजन..आभार

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  19. कल्पना की पराकाष्ठा
    अन्तरिक्ष को छू कर आई कविता !
    कवियों की नन्ही जान,
    शब्दों में मुस्काई कविता !
    ..bahut sundar kavita...

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  20. मन को भाई सुंदर कविता समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत हैhttp://mhare-anubhav.blogspot.com/
    http://aapki-pasand.blogspot.com/

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  21. बहुत सुन्दर लेखन है ..
    मेरा पता कलमदान.ब्लागस्पाट.कॉम
    RITU BANSAL

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  22. वाह ...बहुत ही बढि़या भाव संयोजन इस रचना में .आभार ।

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  23. क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनायें !
    मेरे नये पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/
    http://seawave-babli.blogspot.com/

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  24. माहौल है अब भी वही,पर वह नहीं तेवर रहा
    कवि कर्म भूले,कल्पना में स्वार्थ सीधा दिख रहा

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  25. शहीद स्मारक के क़दमों में
    दीप जला कर आई कविता
    देशप्रेम का जयकारा कर
    तिरंगा फहरा कर आई कविता !
    अन्तरिक्ष को छू कर आई कविता !!
    ak behtareen prastuti sadar abhar .ap mere blog tk aayeen eske liye koti koii abhar ... Nishachay hi apki rachanon ka koi jod nahi hai

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  26. शहीद स्मारक के क़दमों में
    दीप जला कर आई कविता
    देशप्रेम का जयकारा कर
    तिरंगा फहरा कर आई कविता !

    बहुत सुन्दर लगी कविता...

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  27. कविता के इतने सारे रूप और उसके अन्तरिक्ष के किसी भी कोने को न छोड़ने का वर्णन बहुत ही सुंदर लगा. ये कविता भी क्या क्या कर जाती है?
    आभार !

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  28. inqlaab ka dep jalakar swayam amar ho jaati kavita...bahut achche..

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