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गुरुवार, 17 नवंबर 2011

कुछ अलग (दोहे )

                कुछ अलग अर्थात पहली बार दोहे लिखने की कोशिश की है प्रयास कैसा है आप बताएँगे !

                                                                             (१)
                               मंहगाई की मार ने ऐसे जख्म लगाए 
            जिह्वा कंठ में रूधि मुह से न निकली हाय !!                                  
                                     (२)
              पढ़े लिखो के देश में पाखंडी बढ़ते जाएँ 
             आगे आगे बाबा ,करोड़ों पीछे पीछे आयें!! 
                                    (३)
             ओलम्पिक में चूक गए फिर काहे पछताए 
             मंहगाई की दौड़ में स्वर्ण पदक ले आये!!  
                                    (४)
             जाने क्यूँ उन्हें स्वदेश की रोटी नहीं सुहाए 
             चाहे फिर परदेश में धोबी के श्वान बन जाएँ !!
                                    (५)
             कंहा से आया भ्रष्टाचार सब प्रश्न यही दोहराए 
             झांको अपने उर में जरा ,उत्तर वंही समाए!! 

23 टिप्‍पणियां:

  1. तात्कालिक स्थितियों परिस्थितियों का सुन्दर अवलोकन करती पोस्ट!

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  2. महगाई तो कम नही हो सकती जो है उसी में गुजारा करना होगा,...
    बढ़िया दोहे...सुंदर पोस्ट ...

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  3. जाने क्यूँ उन्हें स्वदेश की रोटी नहीं सुहाए
    चाहे फिर परदेश में धोबी के श्वान बन जाएँ !!...per apna ghar phir apna hi ghar hai

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  4. सच्चाई को बयां करते दोहे .
    भाव सुन्दर हैं . हालाँकि तकनीकि दृष्टि से सुधार की आवश्यकता है .

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  5. ओलम्पिक में चूक गए फिर काहे पछताए
    मंहगाई की दौड़ में स्वर्ण पदक ले आये!!

    सुन्दर दोहा आज के समय के अनुकूल ..!

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  6. ओलम्पिक में चूक गए फिर काहे पछताए
    मंहगाई की दौड़ में स्वर्ण पदक ले आये!!

    वाह...कमाल के दोहे.

    नीरज

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  7. आपकी किसी पोस्ट की चर्चा है ... नयी पुरानी हलचल पर कल शनिवार 19-11-11 को | कृपया पधारें और अपने अमूल्य विचार ज़रूर दें...

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  8. सुंदर और सटीक दोहे ...बहुत बढ़िया

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  9. Bahut achhi koshish, bahut sundar bhav, per mujhe nahi lagta ye dohe ki paribhashanusar sahi men dohe kahe jayenge.

    Life is Just a Life
    My Clicks
    .

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  10. अच्छा प्रयास है...
    भाव बड़े ही सामयिक और सार्थक हैं....
    सादर....

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  11. ओलम्पिक में चूक गए फिर काहे पछताए
    मंहगाई की दौड़ में स्वर्ण पदक ले आये!!
    (४)
    जाने क्यूँ उन्हें स्वदेश की रोटी नहीं सुहाए
    चाहे फिर परदेश में धोबी के श्वान बन जाएँ !!

    करारा वार करते सटीक दोहे।

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  12. अच्छें हें .अच्छें हें ..बधाई

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  13. ओलम्पिक में चूक गए फिर काहे पछताए
    मंहगाई की दौड़ में स्वर्ण पदक ले आये!!

    कहीं-कहीं, जरा-जरा.........बाकी सटीक दोहे.

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  14. ओलम्पिक में चूक गए फिर काहे पछताए
    मंहगाई की दौड़ में स्वर्ण पदक ले आये!! exceelent

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