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रविवार, 25 मार्च 2012

जीवन महा मंत्र बिनु ||


जैसे अंखियन नीर बिनु,जैसे धेनु क्षीर बिनु 
जैसे भोजन खीर बिनु,जैसे होली अबीर बिनु 
तैसे जीवन धीर बिनु ||
जैसे धरणी मेह बिनु ,जैसे मानव गेह बिनु 
जैसे ज्योति नेह बिनु ,जैसे रजक रेह बिनु 
तैसे जीवन स्नेह बिनु ||
जैसे  रैना चन्द्र बिनु ,जैसे सैन्या यन्त्र बिनु 
जैसे युद्ध षड्यंत्र बिनु ,जैसे कृषक जंत्र बिनु 
तैसे जीवन महा मंत्र बिनु ||
 भूर्भुवः स्वः ||

17 टिप्‍पणियां:

  1. वाह.....
    आनंद आ गया पढ़ कर राजेश जी...
    बहुत बहुत सुन्दर............

    सादर.

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  2. बहुत बढ़िया लिखा है, शुभकामनाएँ.

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  3. वैसे ही नेट समय बिनु - अधुरा ! सुन्दर भाव !

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  4. अद्भुत ! बहुत सुंदर प्रस्तुति...

    http://aadhyatmikyatra.blogspot.in/

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  5. बहुत सुंदर भाव अभिव्यक्ति सुन्दर रचना..

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  6. बाकी सब एक दूसरे की पूर्णता के लिए हैं। बस,युद्ध और षड्यंत्र का मेल नहीं हो पा रहा।

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  7. waah anand aa gaya rajesh ji ...jeevan ka saar , bahut umda .


    meri nayi post shayad aapko pasand aaye

    http://sapne-shashi.blogspot.in/2012/03/blog-post_28.html

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  8. कमाल की खूबसूरती है इस रचना में ....
    आभार आपका !

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  9. bahut sundar rachna aur rachna ka saar ek hi pankti me....तैसे जीवन महा मंत्र बिनु |

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