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गुरुवार, 20 अक्तूबर 2011

एक ग़ज़ल

तोड़ कर फेंक ना मुझे राहों में इस तरह ,
तेरे ही दामन में उलझ जाउंगी कभी !
छू ले अपने अधरों से मेरी ग़ज़ल का प्याला 
वरना टूट के बिखर जाउंगी तेरे क़दमों में कभी !
अपने दिल से मुझे इस तरह तू दूर ना कर 
छुप कर बैठ जाउंगी तेरे  हाथों की लकीरों में कभी !
खुदा के वास्ते यूँ  गुरूर  करना ठीक नहीं 
तेरी रुसवाई की आंधी ना बन जाऊं कभी !
तेरे हाथो में लिए अखबार की कसम 
इसी की सुर्खियाँ ना बन जाऊं कभी !

28 टिप्‍पणियां:

  1. अपने दिल से मुझे इस तरह तू दूर ना कर
    छुप कर बैठ जाउंगी तेरे हाथों की लकीरों में कभी !waah, bahut hi sundar

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  2. वाह ... बहुत गहरी बात कह दी है आपने इस गज़ल में ...

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  3. बेहतरीन गजल है।
    -----
    कल 22/10/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  4. आपकी प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  5. तेरे हाथो में लिए अखबार की कसम
    इसी की सुर्खियाँ ना बन जाऊं कभी !

    इस तरह किसी को डराना ठीक नही……………सुन्दर प्रस्तुति।

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  6. har sher bahut sundar...

    तेरे हाथो में लिए अखबार की कसम
    इसी की सुर्खियाँ ना बन जाऊं कभी !

    daad sweekaaren.

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  7. शानदार उम्दा लफ्जो से लिखी 'एक गजल,रचना मुझे बेहद पसंद आयी,
    पहली बार आपके ब्लॉग आना मेरा सार्थक रहा....बधाई

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  8. गजल की तासीर उसकी गहराईयों का पता देती है ,महफूज कर देती है ,उसकी स्वीकार्यता को , शुक्रिया ,शिल्प का ..../

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  9. उम्दा लेखन....
    आद वंदना जी सहमत...
    सादर बधाई...

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  10. बहुत खूब!
    बहुत हि दिल से दिल के करीब महसूस होती मालुम पड़ी!
    शुभकामनायें!

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  11. बहुत ही खुबसूरत प्रस्तुति| धन्यवाद|

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  12. हरेक शेर अच्छा लगा ...बढ़िया प्रस्तुति

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  13. अपने दिल से मुझे इस तरह तू दूर ना कर
    छुप कर बैठ जाउंगी तेरे हाथों की लकीरों में कभी !

    ...बहुत सुन्दर

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  14. सुन्दर सृजन के लिए बधाई स्वीकारें.

    समय- समय पर मिले आपके स्नेह, शुभकामनाओं तथा समर्थन का आभारी हूँ.

    प्रकाश पर्व( दीपावली ) की आप तथा आप के परिजनों को मंगल कामनाएं.

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  15. सुंदर भावों की प्रस्तुति ग़ज़ल के रूप में !
    बहुत बढि़या।

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  16. बहुत बढ़िया लिखा है...सुर्खियाँ बहुत अच्छी लगी..वाह.

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  17. सराहनीय रचना.
    दीपोत्सव की शुभकामनायें.

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  18. दीये की लौ की भाँति
    करें हर मुसीबत का सामना
    खुश रहकर खुशी बिखेरें
    यही है मेरी शुभकामना।

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  19. आपको एवं आपके परिवार के सभी सदस्य को दिवाली की हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनायें !
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  20. बहुत ही खुबसूरत प्रस्तुति|

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