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सोमवार, 23 दिसंबर 2013

कितनी कहावतें ||दोहे||


कष्ट सहे जितनी यहाँ,डालो उन पर धूल|
अंत भला सो सब भला ,बीती बातें भूल||

विद्या वितरण से खुलें ,क्लिष्ट ज्ञान के राज|
कुशल तीर से ही सधे ,एक पंथ दो काज||

कृष्ण काग खादी पहन,भूला अपनी जात|
चार दिवस की चाँदनी,फिर अँधियारी रात||

जिसके दर पर रो रहा , वो है भाव विहीन|
फिर क्यों आगे भैंसके,बजा रहा तू बीन||

सफल करो उपकार में,जीवन के दिन चार|
अंधे की लाठी पकड़ ,सड़क करा दो पार||

       
विटप बिना जो नीर के ,जड़ से सूखा जाय|
 सावन का अंधा उसे ,हरा हरा बतलाय||


बुरी बला लालच समझ ,मन का तुच्छ विकार|
जितनी चादर ढक सके ,उतने पैर पसार||

तू देखेगा और का ,भगवन तेरा हाल|
बस करके नेकी यहाँ ,दरिया में तू डाल||

             लाया क्या कुछ साथ तू ,जो ले जाए साथ|
              छूटेगा सब कुछ यहाँ ,जाना खाली हाथ||

                       *********

15 टिप्‍पणियां:

  1. बेहतरीन ...बहुत सुंदर सार्थक दोहे ...!!बहुत सुंदर प्रस्तुति ...!!

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  2. हर दोहे में कुछ महत्वपूर्ण अर्थ निहित है ! बहुत सुन्दर |
    नई पोस्ट चाँदनी रात
    नई पोस्ट मेरे सपनों का रामराज्य ( भाग २ )

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ही सुंदरता से संजोए हैं सभी दोहे ... अर्थ पूर्ण दोहे ...

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुन्दरता से अभिव्यक्त किया है ...

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  5. सुन्दरता से अभिव्यक्त किया है ...

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (29-12-2013) को "शक़ ना करो....रविवारीय चर्चा मंच....चर्चा अंक:1476" पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    नव वर्ष की अग्रिम हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

    सादर...!!

    - ई॰ राहुल मिश्रा

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