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शनिवार, 24 दिसंबर 2011

कुछ कड़वी क्षणिकाएं



गैरों पे शक करता रहा 
दिल नासमझ निकला 
अपनी जमीं तो खींचने वाला 
कोई अपना ही निकला !

कुछ ऐसी चली गर्म हवा
जिसमे अपनत्व के खंड पिघले 
समझते थे जिन्हें पास 
वो दिल से कोसों दूर निकले !

किसी और से क्या शिकवा 
जीवन में जब अँधेरा होता है 
उजाले में संग चलने  वाला 
साया भी कहाँ होता है !

छुपा के खुद को यादों से 
दर्द में दफ़न कर लिया 
अब ले चलो जनाजा 
हमने तो सफ़र कर लिया !

फंसी हुई थी मैं अपनत्व के जाल में 
हवा के एक ही झोंके ने आजाद कर दिया !




मंगलवार, 20 दिसंबर 2011

कविता

कल्पना की पराकाष्ठा
अन्तरिक्ष को छू कर आई कविता !
कवियों की नन्ही जान,
शब्दों में मुस्काई कविता !
कभी दोहा, कभी छंद 
कभी ग़ज़ल कभी गीत अनुबंध 
हर रूप में समाई कविता
हिंदी  साहित्य के सागर  में 
डूब के नहाई कविता 
अन्तरिक्ष को छू कर आई कविता !
पञ्च तत्वों की ओढ़ चुनर 
फसलों संग लहराई कविता 
फूल फूल पर कलि कलि पर 
तितली बन इठलाई कविता !
अन्तरिक्ष को छू कर आई कविता !
राजनीति के गलियारों में
 सेंध लगा कर आई कविता 
भ्रष्टाचार के सड़े फूंस  में 
आग लगा कर आई कविता !
अन्तरिक्ष को छू कर आई कविता !
शहीद स्मारक के क़दमों में 
दीप जला कर आई कविता 
देशप्रेम का जयकारा कर 
तिरंगा फहरा कर आई कविता !
अन्तरिक्ष को छू कर आई कविता !!

   

शनिवार, 17 दिसंबर 2011

मैं मूढ़ मति

 पग- पग पे समझाया उसने 
मैं आगे कदम बढ़ाती रही, 
जिन राहों पर रोका उसने 
मैं उन राहों पर जाती रही !
पतन खड़ा तेरी चौखट पे 
मैं जीत का जश्न मनाती रही, 
गलत है ये टोका उसने 
मैं धूल की तरह उड़ाती रही!
हरसूं मैं तुझको देख रहा 
मैं अट्टाहस कर झुठलाती रही 
औंधे मुंह गिर जाओगी 
मैं खुल के पेंग बढ़ाती रही !
जब खिसक गई पैरों से जमीं
मैं मूढ़ मति किस्मत पे दोष लगाती रही ! 

  

बुधवार, 14 दिसंबर 2011

पर का बोझ

मेरे ख़्वाबों के परों को आसमाँ मिलता रहा पर,उसको गज भर जमीं  ना मिली !
कितनी सुद्रढ़ है मेरे आशियाने की नीव पर ,  उसको एक पग देहली  ना मिली!
हीरे मणिक,रत्नों से भरा है मेरा पारावार पर, उसको खारी एक बूँद  ना मिली!
सतपक्वानो से भरी है मेरी थाली पर, उसे दो सूखी रोटी  ना मिली !
कितनी गर्म ,नर्म है मेरी रिजाई पर,उसे फटी एक कंबली  ना मिली !
फिर भी कितने सुकून से सोता है वो पर ,मुझे इक पहर भर नींद ना मिली !
और मैं इस पर के बोझ से भरी गठरी को अपनी नाव में रख कर जीवन भर खेती चली गई !!!     

रविवार, 11 दिसंबर 2011

काला पानी ,सेल्लुलर जेल

अगर आप देश भक्त हैं तो जरूर पढ़े -----


Cellular Jail Slideshow: Rajesh’s trip to मुssoorie, Uttarakhand, India was created by TripAdvisor. See another Mussoorie slideshow. Create a free slideshow with music from your travel photos.aaआज का दिन हमारे लिए ख़ास था !
सेलुलर जेल के विषय में बहुत कुछ सुन और पढ़ रखा था अतः उसको 
पास जाकर देखने की इच्छा थी !
अपने आप को उस वक़्त उस परिस्थिति में आत्मसात करने की हार्दिक  इच्छा थी,सो आज पूरी हो गई !जो कुछ मैंने वहां जाना ,समझा वही आप सब से बाँट रही हूँ !
अंडमान में कुल १८४ छोटे बड़े आईलेंड हैं !सबसे बड़ा और अन्य
 राज्यों के नजदीक पोर्ट ब्लेयर है जो अंडमान की केपिटल बनाया गया है ,यंही पर स्थित है सेलुलर जेल !

   इस जेल का निर्माण १८९६ में शुरू हुआ और १९०९ में पूर्ण हुआ !
इसको बनाने में जो ईंटे प्रयोग की गई वो बर्मा से लाइ गई थी !
बिल्डिंग में सात विंग हैं जो साइकिल के पहिये के आकार में बनाये
गए हैं !सबसे ऊपर एक कमरा है जिसमे बहुत बड़ी घंटी है जो अलार्म का काम करती थी तथा जिससे सातों विंग्स पर नजर रखी जा  सकती थी !



उसमे ६९८ कैद कोठरी हैं जिनका आकार ४.५ -२.७ मीटर है 
हर कोठरी में एक रोशनदान है !एक कैदी दुसरे से बात
 नहीं कर सकता था उसी के ऊपर इसका नाम सेलुलर पड़ा !
सबसे पहले १० मार्च १८५८ में सुप्रिडेंट ज.बी वालकर 
२०० फ्रीडम फाइटर्स के साथ अंडमान में आया 
फिर १८६८ में ७३३ का बेच अप्रैल में आया वहां 
उनको जंगलों में पेड़ों से बांधकर रखा जाता था 
तेज बारिश में जंगलों में कीड़े ,बिच्छुओं ,जोक आदि के साथ
 सड़क बनाने के लिए जंगलों की सफाई कराइ जाती थी !
फिर जेल में स्वतंत्रता सेनानियों को लाने का सिलसिला शुरू हुआ 
उनको तरह तरह की यातनाएं दी जाती थी सब्जी में जंगल की 
बड़ी बड़ी घास को उबालकर खिला देते थे मल मूत्र तक खाने के
 लिए बाध्य करते थे !
फिर हमने रात को लाईट एंड साउंड का प्रोग्राम देखा ---
कुछ चित्र उस वक़्त के ---



यह प्रग्राम बहुत हर्दय स्पर्शी रहा !नाटक के रूप में कुछ इसके अंश प्रस्तुत किये गए ,उसमे एक पीपल के जीवंत पेड़ को सूत्रधार बनाया गया !
यह पेड़ आज भी जेल के प्रांगन में जस का तस खड़ा है !पीपल का यह पेड़ उस समय के सारे द्रश्यों सारी दुःख भरी यादों को अपने में समेटे हुए है 
यह कहता है जाने कितनी आंधिया चली बवंडर आये जो मुझे हिला भी न सके किन्तु जब जब मेरे देश भक्तों की चीखें मेरे कानों में पड़ती थी न जाने कितने पत्ते मेरे थर थर कांपते हुए शरीर से कूद कर आत्महत्या कर लेते थे   
मेरी हर डाल पर बुलबुले बैठ कर देश भक्ति के गीत गाती थी !
मैं दूर से सब कुछ देखता रहता जब मेरे वीर की कमर पर कोड़े बरसते थे तो उसके साथ मैं भी बोलता था बन्दे मातरम !जब वो भूख हड़ताल करते थे मैं अपने पंखों से उनको शुद्ध हवा देकर जिन्दा रखने की कोशिश करता !उनको नया उदय होता हुआ सूरज दिखाता !
उस समय ली गई विडियो के दो क्लिप देखिये अँधेरा बहुत था पर मुश्किल से यह छोटी सी क्लिपिंग कुछ स्पष्ट आई 
   video
    जैसे जैसे प्रोग्राम चल रहा था लोगों के दिल में देशभक्ति की भावना व 
गुस्सा भी भरता जा रहा था सभी के मन में यही बात आ रही थी की कितनी क़ुरबानी कितनी यातनाएं सह कर हमने यह आजादी पाई और आज हमारा देश कितने भ्रष्ट ,कितने बेईमान ,मक्कार हाथों में चला गया 
है काश आज इन लोगों के लिए यह सेलुलर फिर खुल जाये !!!
हमारी   सरकार के पास तो आज तक यह आंकड़े भी नहीं हैं की इस सेलुलर में कितने देशभक्त कैदी रखे गए हैं पर कोशिश करें तो ब्रिटिशर्स 
के पास जरूर होंगे !इस तरह इस प्रोग्राम को देख कर भारी मन से कुछ यादें साथ लेकर हमने अपनी यात्रा समाप्त की !आप भी कभी अंडमान जाएँ तो सेलुलर जेल अवश्य देखिये !  

गुरुवार, 8 दिसंबर 2011

अद्दभुत रोमांचक जोल्ली बॉय और रोस आई लैंड


 jolly buoy islandआज यात्रा की मंजिल वो थी जिसका मुझे इन्तजार था जैसे की मुझे जलक्रीडा का बहुत शौक है और मुझे  जोल्ली बाय के विषय में जानकारी थी की वहां कुछ ख़ास है जैसे वहां पानी के विभिन्न रंगशेड , रेत का अलग रंग पारदर्शी पानी, स्नोर्क लिंग की व्यवस्था, पेंदी में शीशे वाली बोट जिससे समुद्र में नीचे का दिखाई देता है अंडर वाटर डाइविंग इत्यादि ! वहां सफाई की इतनी जबरदस्त व्यवस्था की बोट में चढ़ने से पहले हमारी चेकिंग हुई जो भी प्लास्टिक का सामान था वह बाहर निकाल दिया उन्होंने अपनी पानी की कूलिंग वाली   बोतलें दी बीच पर कोई गंदगी नहीं डाल सकता सब व्यवस्थाएं  प्राक्रतिक वातावरण  में  हैं (very natural surroundind no commercialization) अतः वहां  की सफाई एवं व्यवस्था ने बहुत प्रभावित किया -----देखिये कुछ चित्र वहां के
यह देखिये पानी के अद्धभुत शेड 

स्नोर्क्लिंग (snorkeling) करते हुए मेरा चित्र इस मास्क को पहन कर पानी में नीचे के कोरल मछलियाँ जल जीव  इत्यादि को देख सकते हैं कुछ लड़के वहां पर  ड्यूटी पर रहते हैं और आपको पानी में अन्दर स्नोर्क्लिंग कराते हैं  

ये मेरे बच्चे जो कुछ साल पहले हनीमून के लिए आये थे इस बार मेरे और अपनी दोनों बेटियों को अंडमान दिखाने लेकर आये कितने खुश हैं शायद पुरानी यादें जेहन में ताजा हो  रही हैं वहां घूमने जाने वाले टूरिस्ट में अधिकतर नव युगल दिखाई दिए     
यहाँ देखिये हम शीशे की बोट में बैठकर पानी के नीचे की दुनिया देख रहे हैं एक अनोखा अनुभव था 




वहां दो तीन घंटे बिता कर हम वापस होटल पहुंचे अगले  दिन हमे रोस आई लेंड देखना था इसी पोस्ट में आपको आईलेंड दिखा रही हूँ.

वापस आते हुए बोट का  चित्र titanic style
      
                                                                      रोस आईलेंड Ross island
अगले   दिन रोस आईलेंड पहुंचे वहां बच्चों के लिए एक छोटा सा नेशनल पार्क भी था उसमे हीरण, मोर, बत्तखे खुली लोगों के आसपास घूम रही थी !बच्चों को और क्या चाहिए था उनकी ख़ुशी दोगुनी हो गई !उस पार्क से नीचे की और काफी लम्बी सीढियां हैं जो नीचे बीच पर निकलती हैं नारियल के असंख्य पेड़ तथा कुछ अद्दभुत हजारों साल पुराने पेड़ों के बीच बसा है यह आईलेंड इसके पार्क में ब्रिटिशर्स के आफिसरों के आवास के ,चर्च के खंडहर भी मौजूद हैं -----देखिये कुछ सामग्री वहां से
                                          जट्टी जहाँ से शिप ,बोट चलते हैं 
                                           यह ब्रिटिशर्स के वक़्त का चर्च है 
देखिये हीरण कितने फ्रेंडली हैं वहां पर बच्चों ने सारे बादाम उनको खिलाये और उन्होंने बड़े चाव से खाए  



                                       झूलते हुए नारियल के पेड़ का बिस्तर बना लिया 
देखिये बीच को साफ़ रखने के निर्देश देते हुए वेस्ट चीजों से बनाये गए पप्पेट  
          नीचे  यह  वो गेट है जहाँ  से बोट चलती थी यही टिकेट मिलता है और दुसरे आईलेंड पर जाने के लिए  



  और इस तरह हमारे चार दिन व्यतीत हो गए हमने अंतिम दिन सेलुलर जेल अथवा काला पानी के लिए रखा है  अतः अगली ,अंतिम पोस्ट बहुत महत्वपूर्ण हैं अवश्य देखिये तब तक के लिए विदा all the best 

रविवार, 4 दिसंबर 2011

खूबसूरत हेव लोक आई लेंड

अगला दिन
यात्रा की थकान मिट जाने के बाद अगला दिन पूर्ण ताजगी और स्फूर्ति लेकर आया !सबसे पहले बच्चों की फरमाइश पर अर्थात उनकी पसंद की जगह( फिश अकुरियम )मतस्य घर ,जल जीव शाला गए !

नीचे जो चित्र है कहते हैं की यह मछली बहुत समय पहले लिटिल अंडमान में समुद्र में मरी हुई पाई गई इसके मरने का   कारन तो पता नहीं लगा  आकार में काफी बड़ी थी फिर इसके अस्थ्पिन्जर को यहाँ रख दिया !
देखिये अपनी पसंद की चीजें देखकर बच्चे कितने खुश हैं 
वहां बहुमूल्य कोरल ,प्यारी प्यारी मछली देख कर बच्चों के साथ हमारा भी मन प्रसन्न हो गया !
फिर वहां से हम हेवलोक के लिए चल दिए !
हेव लोक हमे शिप से जाना था !
पहले वहां के लिए सिर्फ बोट चलती थी जो करीब चार पांच घंटे ले लेती थी ,अब एक दो शिप जाते है तेज रफ़्तार के कारण डेढ़ दो घंटे में पहुंचा देते हैं 

                                    यह देखिये बेबी महिका के द्वारा खींचा गया चित्र
शिप के अन्दर का द्रश्य 
अतः हमने मक्रुज्ज़ MAKRUZZ शिप के टिकट लिए जो एक आदमी का आने जाने का १४०० रूपये लेता है ,बहुत खूबसूरत वातानुकूलित अच्छी सुविधाओं से सुसज्जित शिप है बाहर का तापमान ३२ डिग्री था अतः शिप में बहुत आरामदायक यात्रा रही !   
अब हम हेवलोक आइलैंड पहुँच गए !वहां से हमे राधा नगर बीच कार से पहुँचने के लिए दस मिनट लगे 
बहुत सुन्दर बीच ,पारदर्शी पानी जिसमे विभिन्न रंग झलक रहे थे वहां खूब मस्ती की 
जो एक बात मुझे वहां बुरी लगी वो था वहां के बाथरूम एवं चेंजिंग रूम मेंटेन नहीं थे ,वहां की गवर्मेंट के अन्दर वहां की व्यवस्था आती है हैरानी इस बात की है की इतनी सुन्दर जगह कुदरत का खजाना कहेंगे तो बेहतर होगा उस जगह कोई व्यवस्था नहीं ......बस सरकार की लापरवाही कह सकते हैं !
देखिये कुछ चित्र बीच के ------

नीचे के चित्र में बीच पर सवारी कराता हाथी 


                                                   कुछ देर हमने यहाँ वक़्त बिताया 
समुद्र में जाने से पहले हमे ये निर्देश पढ़ लिए थे वहां हर बीच पर बोर्ड पर यह जरूर लिखा हुआ मिलता था की क्रोकोडाइल से सावधान !

 अब हमको ढाई तीन घंटे बाद वापस उसी शिप से जाना था अतः जल्दी जल्दी सामान पैक करके वापस चल दिए !जब शिप के लिय वेट कर रहे थे तो देखो बच्चे कैसे टाइम पास कर रहे थे 

शाम ढलने वाली थी शिप के अन्दर से ही सन सेट की पिक्चर ली !देखिये शाम का नजारा 

 शिप के बाहर से खींचती तो ये चित्र और भी खूबसूरत होते किन्तु शिप की कोई विंडो खुली हुई नहीं थी और सन सेट यात्रा के बीच में ही हुआ !
--  और सूरज ढल गया ---हमारी यात्रा का वह दिन भी ढल गया !
अगली पोस्ट में मैं आपको अद्दभुत अनोखा जोल्ली बॉय आई लेंड दिखाउंगी तब तक के लिए विदा ! 

शुक्रवार, 2 दिसंबर 2011

चित्ताकर्षक अंडमान द्वीप समूह

खूबसूरत लुभावने ,मंत्रमुग्ध करने वाले द्रश्यों को अपने दिल दिमाग और कैमरे में कैद कर के वापस आई हूँ आज आप लोगों से सांझा कर रही हूँ आशा है आपको पसंद आयेंगे !
अपनी यात्रा शुरू करने से पहले मैं अंडमान के इतिहास के विषय में कुछ बाते बताना चाहती हूँ !
अंडमान निकोबार जो बे ऑफ़ बंगाल में बहुत से द्वीपों के समूह से घिरा हुआ है इस टेरिटरी की राजधानी  पोर्ट  ब्लेयर  है ! 
कहते हैं सबसे पहले मार्को पोलो नामक पश्चिमी यात्री इस द्वीप पर पहुंचा था !
उसके बाद कान्होजी अंग्रे नामक मराठी, नेवी के एडमिरल ने अपना नेवल बेस वहां बनाया १८ वि सदी में 
ब्रिटिश और पुर्तगीज नेवल सेना ने उसको युद्ध में हरा दिया !
१७८९ में ब्रिटिश ने अपनी कालोनी वंहा स्थापित की जो १७९६ में उन्होंने छोड़ दी किन्तु १८ वी सदी में भी वहां उनका कंट्रोल चलता रहा उसी दरमियान उन्होंने वहां दांडिक कालोनी बनाई जिसको काला पानी या सेल्लुलर जेल भी कहा जाता है !जो भी व्यक्ति ब्रिटिश सरकार के इच्छानुरूप काम नहीं करता था उसको अपराधी करार 
देकर उस कालापानी जेल में डाल दिया जाता था बाद में तरह तरह की यातनाये देकर मार दिया जाता था !

सेकंड वर्ल्ड वार के दोरान जापानी शासन ने अंडमान पर मार्च २१ १९४२ से ओक्टुबर १९४५ तक  राज्य किया !
कहते हैं जापानी शासक ने अंडमान के लोगों को अपने विश्वास में लेकर उनका काफी उत्थान किया वहां बहुत 
उन्नति की लोगों को कृषि करना सिखाया स्वावलंबी बनाया !किन्तु धीरे धीरे वंहा के लोगों को उनपर शक होने लगा तब उन्होंने उनका बहिष्कार करना शुरू किया !बाद में ब्रिटिश सरकार के सामने उन्होंने घुटने टेक दिए और अपने देश लौट गए !

१९४७ में जब देश आजाद हुआ तब अंडमान को इंडिया यूनियन का हिस्सा बना दिया गया !आज अंडमान 
इंडिया की सात टेरिटरी में से एक है !तथा सेलुलर जेल को एक म्युसियम में तब्दील कर दिया है जिसे देखने दूर दूर से लोग आते हैं ! 


२४ नवम्बर २०११------
             सुबह के तीन बजे मैं बच्चों के साथ  इंदिरा गाँधी एयर पोर्ट पर पंहुची वहां से पांच बजे एयर इंडिया की फ्लाईट से पोर्ट ब्लेयर जाना था !आज कल देल्ही से डाइरेक्ट फ्लाईट शुरू हो चुकी है जो भुवनेश्वर उड़ीसा होते हुए पोर्ट ब्लेयर पहुचती है ! भुवनेश्वर में आधे घंटे का हाल्ट है !
ये देखिये सुबह के तीन बजे एयर पोर्ट का नजारा -----
ऐसे द्रश्य कई जगह मिले !टाइम ही ऐसा था नींद तो आनी ही  है एयर पोर्ट हुआ तो क्या हुआ !
चेक इन करके जल्दी से बेबी इनिका का फोटो लिया हाथी का यह स्टेचू बहुत सुन्दर है ! 


लगभग पांच घंटे की यात्रा थी दो घंटे बाद प्लेन ने भुवनेश्वर में लेंड 
किया वहां से यात्री लेकर फिर उड़ान भरी और ढाई घंटे बाद हम ने  वीर सावरकर विमान पत्तनम पोर्ट ब्लेयर  में लेंड किया !
हमे पीयरलेस रिसोर्ट में ठहरना था !यह रिसोर्ट समुद्र के किनारे पर ही स्थित है बहुत खूबसूरत जगह है सुनामी के वक़्त इसमें काफी नुक्सान हुआ था उसके बाद फिर से इसे बनाया गया है !
रिसोर्ट से लगा हुआ बीच बहुत साफ़ और सुन्दर 

कुछ तस्वीरे वहां की -----(बाकी अगली पोस्ट में )